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अगर आप अब भी सैयारा के खुमार में ही हैं तो धड़क 2 उसका उतारा है। भोपाल और सीहोर में शूट की गई धड़क 2 जातिगत भेदभाव को बिना किसी लाग–लपेट के सामने लाती है। आरक्षण और सामाजिक अन्याय के प्रति समाज के दोहरे रवैये को बखूबी उजागर करता है। फिल्म न केवल जाति, बल्कि वर्ग, लिंग, और विशेषाधिकार जैसे मुद्दों को भी छूती है। यह दिखाती है कि प्रगतिशीलता का दावा करने वाले लोग भी, जब बात अपने हितों की आती है, तो कैसे पीछे हट जाते हैं।
जातिगत भेदभाव, सामाजिक असमानता, और प्यार की जटिलताओं को एक संवेदनशील और विचारोत्तेजक ढंग से प्रस्तुत करती है। फिल्म एक युवा के इर्द–गिर्द घूमती है। एक दलित परिवार से आने वाला महत्वाकांक्षी कानून का छात्र, जो एक प्रतिष्ठित कॉलेज में दाखिला लेता है। वहां उसकी मुलाकात होती है विधि ( से, जो एक उच्च जाति की संपन्न परिवार की बेटी है। दोनों की दोस्ती धीरे–धीरे प्यार में बदलती है, लेकिन यह रिश्ता समाज की कठोर दीवारों से टकराता है। विधि के परिवार और कॉलेज के माहौल में नीलेश को बार–बार उसकी जाति के कारण अपमानित किया जाता है।
नायक न केवल अपनी शिक्षा और सपनों के लिए लड़ता है, बल्कि अपनी पहचान और आत्मसम्मान को बचाने के लिए भी लड़ाई लड़ता है। नायिका विधि का किरदार इस कहानी में एक जटिल परत जोड़ता है; वह एक ऐसी लड़की है जो शुरू में प्रगतिशील दिखती है, लेकिन जब बात अपने विशेषाधिकार और परिवार के सम्मान की आती है, तो उसकी कमजोरियां उजागर होती हैं। यह फिल्म प्यार को केवल रोमांटिक लेंस से नहीं, बल्कि सामाजिक और मनोवैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी देखती है। फिल्म में सिद्धांत चतुर्वेदी, तृप्ति ढिमरी, विपिन शर्मा, दीक्षा जोशी, मंजरी पुपला, सौरभ सचदेवा आदि हैं।
यह फिल्म सैयारा का उतारा है। विचारवान लोगों के लिए है।



