Parliament Monsoon Session 2026: संसद के आगामी मानसून सत्र से पहले महिला आरक्षण विधेयक (Women Reservation Bill) और परिसीमन विधेयक (Delimitation Bill) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विश्वास जताया है कि इस बार दोनों अहम संविधान संशोधन विधेयक संसद से पारित हो जाएंगे।
पत्रकारों से बातचीत में अठावले ने कहा कि पिछले संसदीय सत्र में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी (सपा) और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने इन संविधान संशोधन विधेयकों का विरोध किया था, जिसके कारण वे आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सके। लेकिन अब उनका दावा है कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के पास स्पष्ट बहुमत है और इस बार दोनों विधेयकों के पारित होने की संभावना मजबूत है।
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उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पारित होने के बाद 2029 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में महिलाओं को आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन (Delimitation) की प्रक्रिया हर 30–35 वर्षों में की जाती है और बदलती जनसंख्या के अनुरूप यह आवश्यक कदम है।
रामदास अठावले ने विपक्षी दलों से भी अपील की कि वे राष्ट्रीय हित में इन विधेयकों का समर्थन करें। उनका कहना था कि संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना और निर्वाचन क्षेत्रों का संतुलित पुनर्गठन लोकतंत्र को और मजबूत करेगा।
महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) के प्रमुख अठावले ने यह भी दावा किया कि टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) के कुछ सांसद एनडीए का समर्थन कर सकते हैं। इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि डीएमके के कांग्रेस से अलग होने जैसी राजनीतिक परिस्थितियों के कारण सरकार की स्थिति पहले से अधिक मजबूत दिखाई दे रही है।
अठावले ने कहा, “हमारे पास दो-तिहाई बहुमत है। महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक दोनों संसद से पारित हो जाएंगे।”
गौरतलब है कि 17 अप्रैल को संसद के विस्तारित सत्र के दौरान महिलाओं को 2029 से विधानसभाओं और लोकसभा में आरक्षण देने तथा लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में आवश्यक बहुमत हासिल नहीं कर सका था। मतदान में 298 सांसदों ने समर्थन और 230 सांसदों ने विरोध किया था। कुल 528 सांसदों के मतदान में विधेयक को पारित होने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी, जो पूरी नहीं हो सकी।
अब सभी की नजरें संसद के आगामी मानसून सत्र पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि क्या महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बड़े राजनीतिक सुधारों को इस बार संसद की मंजूरी मिल पाएगी।
आपकी राय क्या है?
क्या महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक इस बार संसद से पारित हो जाने चाहिए? और क्या 2029 से महिलाओं को आरक्षण लागू करना भारतीय लोकतंत्र के लिए सही कदम होगा?
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