Dhar Bhojshala में नहीं पढ़ी जाएगी नमाज, सुप्रीम कोर्ट ने आसपास व्यवस्था करने को कहा, ढांचा न बदलने का आदेश

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नई दिल्ली। मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला में नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने इसकी इजाजत देने से इनकार कर दिया है। कोर्ट ने भोजशाला परिसर के पास नमाज पढ़ने की ‌‌‌व्यवस्था करने का आदेश दिया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि भोजशाला परिसर में कोई ढांचागत बदलाव नहीं होगा।

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष द्वारा दाखिल की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि एएसआई द्वारा भोजशाला परिसर में कोई भी ढांचागत बदलाव नहीं किया जाएगा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस मोहना की बेंच ने मंगलवार को इस मामले में सुनवाई की। कोर्ट ने जहां नमाज को लेकर एक अंतरिम व्यवस्था बनाने का प्रस्ताव दिया, वहीं हाईकोर्ट द्वारा लंदन म्यूजियम से वाग्देवी (सरस्वती) की मूर्ति वापस लाने के आदेश पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं।

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नोटिस जारी कर मांगा जवाब

सुनवाई के बाद मुस्लिम पक्ष की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने हिंदू पक्ष, राज्य सरकार, DM और ASI को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अब इस मामले में जुलाई के तीसरे हफ्ते में अगली सुनवाई होगी। सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि परिसर में शुक्रवार को नमाज़ पर रोक बरकरार रहेगी। इसके अलावा सर्वोच्च अदालत ने हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने से फिलहाल इनकार करते हुए कहा कि भोजशाला परिसर के पास नमाज के लिए हर शुक्रवार 1-3 के बीच अलग जगह मुहैया कराया जाए।

नमाज के लिए वैकल्पिक जगह का प्रस्ताव

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने शुक्रवार की नमाज जारी रखने की मुस्लिम पक्ष की मांग पर अंतरिम व्यवस्था का प्रस्ताव रखा। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से पूछा कि क्या भोजशाला परिसर के आसपास नमाजियों के लिए कोई खुली जगह उपलब्ध कराई जा सकती है। सीजेआई सूर्य कांत ने मुस्लिम पक्ष से भी सवाल किया कि क्या हम आसपास के एरिया में नमाज की व्यवस्था के आदेश दे सकते हैं? जब तक इस मामले में अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक के लिए ऐसी अंतरिम व्यवस्था की जा सकती है। चीफ जस्टिस ने आगे कहा कि हमने पहले बसंत पंचमी के दिन भी एक अंतरिम व्यवस्था की थी और दोनों पक्षों को पूजा-अर्चना की इजाजत दी थी। हमने वह आदेश तब दिया था जब मामला अदालत में विचाराधीन था, लेकिन अब हाईकोर्ट का फाइनल फैसला आ चुका है।

मुस्लिम पक्ष ने कहा-नमाज पर पूरी तरह है रोक

मुस्लिम पक्ष के वकील हुजेफा अहमदी ने बेंच के सामने अपनी बात रखते हुए कहा कि शुक्रवार को होने वाली नमाज पर अब पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। हमें अब परिसर से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है और पिछले 40 साल से जो नमाज निर्बाध रूप से चल रही थी, उस पर भी अचानक रोक लगा दी गई है। सुनवाई के शुरुआत में ही मुस्लिम पक्ष ने शीर्ष अदालत से मांग की है कि परिसर में पिछले 40 साल पुरानी स्थिति को दोबारा बहाल किया जाए। इन दलीलों को सुनने के बाद चीफ जस्टिस ने कहा कि कोर्ट इस मामले में नोटिस जारी करेगा और आगे की सुनवाई के लिए एक तारीख तय की जाएगी।

मूर्ति वापस लाने के फैसले पर हैरानी

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश पर भी हैरानी जताई, जिसमें लंदन म्यूजियम से देवी सरस्वती की मूर्ति वापस लाने की बात कही गई थी। बेंच में शामिल जस्टिस जॉयमाला बागची ने पूछा कि कोई संवैधानिक कोर्ट इस तरह का आदेश कैसे दे सकता है?

Ardhendu Bhushan
Ardhendu Bhushanhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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