india-UK Free Trade Agreement (FTA) आज से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। इसे भारत के सबसे बड़े और व्यापक मुक्त व्यापार समझौतों में से एक माना जा रहा है। सरकार का कहना है कि इस समझौते से किसानों, एमएसएमई, निर्यातकों, स्टार्टअप, महिला उद्यमियों, पेशेवरों और सेवा क्षेत्र को नए अवसर मिलेंगे, जबकि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापारिक रिश्तों को नई मजबूती मिलेगी।
इस Comprehensive Economic and Trade Agreement (CETA) के तहत भारत के करीब 99% निर्यात को ब्रिटेन के बाजार में शुल्क-मुक्त (Duty-Free) पहुंच मिलेगी। इससे रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, फुटवियर, कालीन, मसाले, प्रोसेस्ड फूड, फल-सब्जियां, समुद्री उत्पाद, ऑटो पार्ट्स, मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे भारतीय उत्पादों की ब्रिटेन में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मजबूत होगी।
दूसरी ओर, ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर भारत में आयात शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इसका सीधा फायदा उपभोक्ताओं को कम कीमतों के रूप में मिल सकता है। Scotch Whisky पर फिलहाल 150% आयात शुल्क है, जिसे पहले चरण में घटाकर 75% और अगले दस वर्षों में 40% तक लाया जाएगा। इसके अलावा चॉकलेट, कॉस्मेटिक्स, परफ्यूम, सॉफ्ट ड्रिंक्स, मशीनरी और अन्य प्रीमियम ब्रिटिश उत्पाद भी पहले के मुकाबले सस्ते हो सकते हैं।
ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए भी यह समझौता अहम माना जा रहा है। पहली बार भारत ने किसी एफटीए के तहत ब्रिटेन में बनी पूरी तरह तैयार कारों और ट्रकों पर इतनी बड़ी सीमा शुल्क रियायत दी है। पूरी तरह बनी कारों पर आयात शुल्क 110% से घटाकर चरणबद्ध तरीके से 10% किया जाएगा। पेट्रोल और डीजल कारों को शुरुआत से राहत मिलेगी, जबकि इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन कारों को छठे वर्ष से रियायत दी जाएगी, ताकि शुरुआती वर्षों में भारतीय ईवी उद्योग को संरक्षण मिल सके।
समझौते के तहत डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन भी लागू हुआ है। इसके अनुसार भारत से ब्रिटेन में काम करने जाने वाले कर्मचारियों और उनके नियोक्ताओं को पांच वर्षों तक ब्रिटेन में सोशल सिक्योरिटी योगदान नहीं देना होगा, जिससे भारतीय पेशेवरों और कंपनियों को आर्थिक राहत मिलेगी।
हालांकि, दोनों देशों ने कुछ संवेदनशील उत्पादों को समझौते से बाहर रखा है। भारत ने सेब, अखरोट, कुछ बीज, व्हे, सोने की ईंटों और स्मार्टफोन पर कोई शुल्क रियायत नहीं दी है, जबकि ब्रिटेन ने चावल, चीनी और कुछ मांस उत्पादों को इस समझौते के दायरे से बाहर रखा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि India-UK FTA से व्यापार, निवेश, रोजगार और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी। साथ ही भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और आने वाले वर्षों में दोनों देशों के बीच व्यापार का आकार उल्लेखनीय रूप से बढ़ सकता है।
आपकी राय: क्या भारत-यूके फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से भारतीय उद्योग, किसानों और उपभोक्ताओं को वास्तव में बड़ा फायदा होगा, या इससे विदेशी उत्पादों की प्रतिस्पर्धा बढ़कर घरेलू उद्योगों पर दबाव पड़ेगा? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।



