देश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रामदास अठावले ने विपक्षी गठबंधन INDIA Alliance को लेकर बड़ा दावा करते हुए कहा है कि गठबंधन के भीतर दरारें गहरी होती जा रही हैं और कई दलों में राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल रहे हैं।
अठावले ने शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए कहा कि अब उनके लिए अपने सांसदों और विधायकों को एकजुट रखना बेहद मुश्किल होता जा रहा है। उन्होंने दावा किया कि शिवसेना (UBT) के नौ सांसदों में से छह सांसद पहले ही एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट के साथ जा चुके हैं, जिससे महाराष्ट्र में NDA और महायुति की ताकत और मजबूत हुई है।
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उन्होंने यह भी कहा कि 2019 में उद्धव ठाकरे ने भाजपा के साथ सरकार बनाने और देवेंद्र फडणवीस को मुख्यमंत्री पद पर समर्थन न देकर बड़ी राजनीतिक गलती की थी। अठावले के मुताबिक, उस समय अलग फैसला लिया जाता तो राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह अलग हो सकती थी।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों में विपक्षी दलों के भीतर भी राजनीतिक उथल-पुथल जारी है। उनके अनुसार, कई क्षेत्रीय दलों के नेताओं और सांसदों के राजनीतिक रुख में बदलाव की संभावनाएं बन रही हैं, जिससे आने वाले समय में राष्ट्रीय राजनीति के समीकरण बदल सकते हैं।
इस बीच विपक्षी गठबंधन को लेकर बढ़ती चर्चाओं ने राजनीतिक गलियारों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या विपक्षी एकता वास्तव में कमजोर पड़ रही है, या फिर यह आगामी चुनावों से पहले राजनीतिक दबाव बनाने की रणनीति है? राजनीतिक विश्लेषकों की नजर अब आने वाले महीनों में होने वाले घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।
लोकसभा चुनाव के बाद से ही NDA और INDIA Alliance के बीच सियासी मुकाबला लगातार चर्चा में रहा है। ऐसे में अठावले के ताजा बयान ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।
क्या आपको लगता है कि INDIA Alliance में वास्तव में बड़ी टूट की संभावना है, या यह सिर्फ राजनीतिक बयानबाजी है? क्या आने वाले चुनावों में विपक्ष एकजुट रह पाएगा? अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं।



