Lok Sabha Delimitation News: संसद के आगामी मानसून सत्र में पेश किए जाने वाले 131वें संविधान संशोधन विधेयक (131st Constitutional Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की कार्याध्यक्ष और सांसद सुप्रिया सुले ने इस विधेयक का समर्थन किया है, लेकिन साथ ही साफ कहा है कि लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन (Delimitation) के दौरान किसी भी राज्य के साथ अन्याय नहीं होना चाहिए।
इसी मुद्दे पर पार्टी प्रमुख शरद पवार ने भी केंद्र सरकार से सभी राज्यों के साथ समान और न्यायपूर्ण व्यवहार की मांग की है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस मुद्दे पर INDIA गठबंधन के भीतर अलग-अलग राय सामने आने लगी है, जिससे गठबंधन में मतभेद की चर्चा तेज हो गई है।
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850 तक पहुंच सकती हैं लोकसभा सीटें?
केंद्र सरकार देश की बढ़ती आबादी के अनुरूप लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने की तैयारी में है। चर्चाओं के मुताबिक, यदि यह संविधान संशोधन विधेयक पारित होता है, तो लोकसभा की कुल सदस्य संख्या करीब 850 तक पहुंच सकती है। इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर बेहतर प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना और निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्गठन करना है।
सुप्रिया सुले ने क्या कहा?
सुप्रिया सुले ने कहा कि जनसंख्या के अनुपात में जनप्रतिनिधियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है, इसलिए उनकी पार्टी इस विधेयक का समर्थन करती है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिसीमन की प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और सभी राज्यों के लिए समान होनी चाहिए।

शरद पवार ने दक्षिण भारत के राज्यों की उठाई चिंता
शरद पवार ने कहा कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों के साथ किसी प्रकार का अन्याय नहीं होना चाहिए। उनका मानना है कि परिवार नियोजन को सफलतापूर्वक लागू करने वाले राज्यों का संसदीय प्रतिनिधित्व कम करना उचित नहीं होगा।
उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की कि यदि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को अतिरिक्त सीटें दी जाती हैं, तो जनसंख्या नियंत्रण में सफल राज्यों के हितों की भी पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
क्या महाराष्ट्र को मिलेंगी अधिक लोकसभा सीटें?
यदि परिसीमन लागू होता है, तो महाराष्ट्र की लोकसभा सीटों में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, अंतिम फैसला आगामी जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन आयोग की सिफारिशों के आधार पर होगा। फिलहाल सरकार की ओर से सीटों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
यह विधेयक केवल लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में भारत की राजनीतिक संरचना, राज्यों के प्रतिनिधित्व और चुनावी समीकरणों को भी गहराई से प्रभावित कर सकता है।
आपकी राय क्या है?
क्या लोकसभा सीटों का परिसीमन केवल जनसंख्या के आधार पर होना चाहिए, या जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के हितों को भी बराबर महत्व मिलना चाहिए?
अपनी राय कमेंट में जरूर बताएं। क्या आपको लगता है कि यह विधेयक भारत की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव लाएगा या नए विवादों को जन्म देगा?



