इंदौर। शहर के बहुत बड़े माने जाने वाले स्कूल शिशुकुंज में पिछले दिनों लंच के बाद बहुत सारे बच्चे बीमार पड़ गए थे। इसके बाद जांच-पड़ताल हुई। स्कूल वाले खुद को पाक-साफ बताते रहे, लेकिन पैरेंट्स जाग गए और फिर पता चला कि यहां तो बहुत गड़बड़ी है। इस पूरे मामले में प्रदेश के काबिना मंत्री तुलसी सिलावट जिन्हें तुलसी पहलवान भी कहते हैं काफी सक्रिय नजर आए।
स्कूल की जांच कर 23 नमूने लेकर टेस्ट के लिए भेजे गए थे। इनमें से ड्रिंकिंग वाटर, सोयाबीन तेल, ब्रीओ नमकीन, तुअर दाल एवं अमूल स्ट्रॉबेरी आइसक्रीम के नमूने निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए। अब स्कूल पर कार्रवाई हो रही है। इतने बड़े स्कूल के किचन में यह सब हो रहा था, लेकिन इंदौर निवासी मंत्री तुलसी सिलावट इसे बचाने में लगे रहे।
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हर संबंधित विभाग को लगाया फोन
सूत्र बताते हैं कि तुलसी सिलावट ने जैसे इस स्कूल को बचाने की सुपारी ले ली थी। जब जांच हुई और नमूने ले लिए गए तब से वे सक्रिय हो गए। इंदौर से लेकर भोपाल तक हर उस अधिकारी को उन्होंने फोन लगाया जो इस मामले से जुड़े थे। अधिकारी भी हैरत में कि मंत्रीजी इतने फोन क्यों कर रहे हैं, कहीं इन्होंने स्कूल में साझेदारी तो नहीं ले ली है।
फिर भी किसी ने नहीं रखा मंत्रजी का मान
इस पूरे मामले में एक खास बात यह रही कि हर अधिकारी ने मंत्रीजी की बात तो सुन ली, लेकिन किसी ने मानी नहीं। इसी का नतीजा है कि जांच के लिए भेजे गए अधिकांश नमूने फेल हो गए यानी कि अधिकारियों ने शिशुकुंज को गलत करार दे दिया। यहां तक कि इंदौर में भी मंत्रीजी की नहीं सुनी गई।
मंत्रीजी को अब अलर्ट हो जाना चाहिए
इस मामले के बाद मंत्रीजी को अब अलर्ट हो जाना चाहिए। यह भी विचार करना चाहिए कि आखिर अधिकारियों ने उनकी सुनी क्यों नहीं। इसका कारण भी अधिकारी ही बता रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि मंत्रीजी हर छोटे-बड़े मामलों में फोन लगा देते हैं। चाहे वह मामला इंदौर शहर का हो या ग्रामीण क्षेत्र का मंत्रीजी का फोन आ ही जाता है। अब अधिकारियों के सामने भी धर्मसंकट की स्थिति बन जाती है कि वे दिनभर में मंत्रीजी की कितनी बातें मानें।
स्कूल संचालकों से संबंधों को लेकर भी सवाल
यह मामला सामने आने के बाद अब भाजपा के साथ ही लोगों में भी चर्चा है कि आखिर तुलसी पहलवान का स्कूल संचालकों से क्या संबंध है? स्कूल संचालक तो विशुद्ध रूप से बिजनेसमेन हैं। लोग यह भी सवाल उठा रहे हैं कि आखिर इतने बड़े स्कूल का इतना बड़ा मामला सामने आने के बाद भी मंत्रीजी किस लालच में स्कूल को बचाने की कोशिश में जुटे रहे।



