Nitin Gadkari ने इथेनॉल फ्यूल को लेकर लगाए जा रहे निजी हितों के आरोपों पर पहली बार विस्तार से अपनी बात रखी है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री ने स्पष्ट किया कि इथेनॉल को बढ़ावा देने के पीछे उनका कोई व्यक्तिगत या व्यावसायिक स्वार्थ नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य भारत को आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता से मुक्त करना, किसानों की आय बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देना है।
गडकरी ने कहा कि वह वर्षों से वैकल्पिक ईंधन (Alternative Fuel) के समर्थक रहे हैं। उनके अनुसार, केवल इथेनॉल (Ethanol Fuel) ही नहीं, बल्कि ग्रीन हाइड्रोजन, मेथनॉल, बायोफ्यूल, इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) और अन्य स्वच्छ ऊर्जा विकल्प भी भारत के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उनका मानना है कि देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए पारंपरिक ईंधनों के साथ-साथ वैकल्पिक ईंधनों का उपयोग बढ़ाना आवश्यक है।
👉 यह भी पढ़ें:
- राज्यसभा में मंत्री नितिन गडकरी ने कहा-एक्सप्रेस वे पर बिना कार रोके एआई काटेगा टोल, 1500 करोड़ का ईंधन बचेगा
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का बड़ा बयान, कहा-मैं ब्राह्मण हूं, हमें आरक्षण नहीं मिला, यह भगवान का बहुत बड़ा उपकार
- नितिन गडकरी ने जबलपुर में किया मध्यप्रदेश के सबसे लंबे फ्लाईओवर का उद्घाटन, 60 हजार करोड़ की दी सौगात, टाइगर कॉरिडोर की घोषणा
- केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के घर को बम से उड़ाने की धमकी, पुलिस ने तुरंत छानबीन कर एक को धर धबोचा
- सिर्फ तीन हजार दीजिए और हाईवे पर आराम से करिए सफर, फास्टैग को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया ऐलान
- सिर्फ तीन हजार दीजिए और हाईवे पर आराम से करिए सफर, फास्टैग को लेकर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया ऐलान
उन्होंने उन आरोपों को भी खारिज किया, जिनमें कहा जाता है कि इथेनॉल को बढ़ावा देने से उनके परिवार के कारोबारी हित जुड़े हुए हैं। गडकरी ने कहा कि उनके बेटों के व्यवसाय में इथेनॉल का हिस्सा बहुत ही सीमित है और इससे होने वाली आय का उनके कुल कारोबार पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि उनके परिवार के व्यवसाय पर करीब 1,600 करोड़ रुपये का कर्ज रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे में यह कहना गलत होगा कि इथेनॉल नीति उनके निजी आर्थिक हितों को ध्यान में रखकर बनाई गई है। उनके अनुसार, सरकार की नीतियां हमेशा राष्ट्रीय हित, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं।
गडकरी लंबे समय से यह कहते रहे हैं कि भारत हर साल कच्चे तेल के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है। यदि देश में इथेनॉल, बायोफ्यूल, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग बढ़ता है, तो इससे न केवल पेट्रोल और डीजल पर निर्भरता कम होगी, बल्कि किसानों को भी गन्ना, मक्का और अन्य फसलों से अतिरिक्त आय के अवसर मिलेंगे। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी आने से पर्यावरण को भी लाभ होगा।
उन्होंने दोहराया कि भारत का भविष्य स्वच्छ, सस्ती और टिकाऊ ऊर्जा में है और सरकार इसी दिशा में लगातार काम कर रही है। उनका कहना है कि वैकल्पिक ईंधनों को बढ़ावा देना किसी व्यक्ति या उद्योग विशेष के लिए नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण के लिए जरूरी कदम है।
आपकी राय: क्या भारत को पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम कर इथेनॉल, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे वैकल्पिक ईंधनों को तेजी से अपनाना चाहिए, या अभी पारंपरिक ईंधनों पर ही अधिक भरोसा बनाए रखना बेहतर होगा? अपनी राय हमें कमेंट में जरूर बताएं।



