समय रैना विवाद अब सोशल मीडिया से निकलकर देश के राजनीतिक गलियारों तक पहुंच गया है। दरअसल स्टैंड-अप कॉमेडियन समय रैना के यूट्यूब शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट सीजन 2’ पर नया विवाद खड़ा हुआ है। इस शो के हालिया एपिसोड में बिहार और कश्मीरी पंडितों पर की गई टिप्पणियों के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
यूट्यूब शो में क्षेत्रीय पहचान और समुदाय पर हुई तीखी टिप्पणी
दरअसल 28 और 29 अगस्त 2026 को प्रसारित नवीनतम एपिसोड में समय रैना और कॉमेडियन शेरोन वर्मा नजर आए थे। इस दौरान दोनों कलाकारों के बीच एक-दूसरे की पृष्ठभूमि को लेकर तीखी रोस्टिंग देखने को मिली।
👉 यह भी पढ़ें:
- ग्रेटर नोएडा: 6 साल की बच्ची से रेप और मर्डर का मुख्य आरोपी पुलिस मुठभेड़ में ढेर
- नेपाल बाढ़: भारत ने IAF विमान से भेजी 10 टन राहत सामग्री, लापता भारतीयों की तलाश तेज
- चंद्रा-अंबानी विवाद: कांच के घर में बैठ पत्थर उछालने की कोशिश
- नेपाल बाढ़ में 84 भारतीयों की सुरक्षित वापसी, खोज अभियान जारी
- प्रधानमंत्री मोदी की उज्बेकिस्तान और किर्गिज गणराज्य यात्रा शुरू, द्विपक्षीय वार्ता अहम
- DHFL घोटाले में ED की कार्रवाई, ब्रिटेन में बेचा आलीशान घर
गौरतलब है कि समय रैना खुद कश्मीरी पंडित समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। वहीं पैनलिस्ट शेरोन वर्मा बिहार राज्य से संबंध रखती हैं। इसके बाद दोनों के बीच हुई इस नोकझोंक के कई वीडियो क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित होने लगे। नतीजतन दर्शकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने इस तरह की भाषा पर कड़ा एतराज जताया है।

समय रैना विवाद पर महाराष्ट्र से उठी पहली तीखी राजनीतिक आपत्ति
इसके अलावा महाराष्ट्र में भाजपा विधायक राम कदम ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है। उन्होंने इन विवादित बयानों को केवल सस्ती पब्लिसिटी हासिल करने का अनुचित प्रयास बताया।
दरअसल राम कदम ने स्पष्ट कहा कि कश्मीरी पंडितों के ऐतिहासिक विस्थापन और दर्द का उपहास उड़ाना किसी भी सूरत में सही नहीं है। इसके साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी राज्य की क्षेत्रीय अस्मिता का मजाक उड़ाना समाज में स्वीकार्य नहीं हो सकता।
बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री ने दर्ज कराया कड़ा विरोध
वहीं बिहार सरकार ने भी इस पूरे मामले पर बेहद तल्ख रुख अख्तियार किया है। बिहार के शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने कटिहार में पत्रकारों से बातचीत के दौरान इस विवादित बयानबाजी पर कड़ा ऐतराज जताया।
गौरतलब है कि शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश के किसी भी नागरिक या समुदाय पर अपमानजनक टिप्पणी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसलिए उन्होंने सभी मंचों पर मर्यादा बनाए रखने और जिम्मेदार आचरण सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

जम्मू-कश्मीर के नेताओं ने की संवेदनशीलता बरतने की अपील
इस बीच जम्मू-कश्मीर में भी इस रोस्टिंग विवाद को लेकर गंभीर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जम्मू-कश्मीर के भाजपा विधायक आर. एस. पठानिया ने संवेदनशील ऐतिहासिक मुद्दों पर अत्यंत जिम्मेदारी बरतने की सलाह दी।
इसके अलावा ‘जम्मू एंड कश्मीर पीस फोरम’ जैसे स्थानीय संगठनों ने भी इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की है। इस पूरे मामले में कई अहम पहलू सामने आए हैं:
- ऐतिहासिक विस्थापन और मानवीय दर्द पर गैर-जिम्मेदाराना मजाक बनाने से बचने की मांग उठी।
- किसी भी राज्य की क्षेत्रीय पहचान को निशाना बनाने वाले कॉमेडी फॉर्मेट पर सवाल खड़े हुए।
- डिजिटल मंचों पर काम करने वाले कलाकारों से मर्यादित भाषा और सामाजिक संवेदनशीलता की अपील की गई।
सोशल मीडिया पर समय रैना विवाद को लेकर दर्शकों में बंटी राय
बहरहाल इस पूरे विवाद पर आम दर्शकों और इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के बीच स्पष्ट मतभेद नजर आ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि ऐतिहासिक त्रासदी और सामुदायिक पहचान पर बने चुटकुले पूरी तरह असंवेदनशील हैं।
हालांकि कुछ प्रशंसकों का तर्क है कि यह सब आधुनिक स्टैंड-अप कॉमेडी और रोस्ट फॉर्मेट का सामान्य हिस्सा है। नतीजतन इस समय रैना विवाद ने इंटरनेट पर डिजिटल कंटेंट की नैतिक सीमाओं को लेकर एक नई राष्ट्रीय बहस छेड़ दी है।



