DHFL घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ताज़ा कार्रवाई ने ब्रिटेन में बेची गई आलीशान संपत्ति की जांच को और गहरा कर दिया है। यह घोटाला दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉर्पोरेशन लिमिटेड (DHFL) और उसके प्रमोटरों द्वारा बैंक फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित है।
DHFL घोटाले में ED की कार्रवाई
DHFL घोटाले में ED ने 5.41 मिलियन अमेरिकी डॉलर, जो लगभग ₹51.75 करोड़ है, की बैंक डिपॉजिट को फ्रीज कर दिया है। इसे ‘अपराध की आय’ के रूप में चिन्हित किया गया है। यह कार्रवाई 19 अगस्त 2026 को की गई छापेमारी और 28 अगस्त 2026 को जारी जांच के परिणामस्वरूप हुई। इस छापेमारी में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल सबूत भी बरामद किए गए थे। इन सबूतों के आधार पर ED ने बैंक खातों को फ्रीज कर दिया। जांच में इस बात पर भी जोर दिया जा रहा है कि किस प्रकार से यह धनराशि विभिन्न खातों में घुमाई गई।
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ब्रिटेन में बेची गई संपत्ति
घोटाले की जांच के दौरान यह भी सामने आया कि DHFL के पूर्व प्रमोटर कपिल वधावन की पत्नी वनीता वधावन के नाम पर ब्रिटेन में स्थित ‘हर्टमोर हाउस’ नामक संपत्ति 2026 में बेची गई थी। इस संपत्ति की बिक्री से प्राप्त धनराशि का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया। ब्रिटेन में स्थित इस आलीशान संपत्ति की कीमत करोड़ों में आंकी गई थी। इसे आकर्षक कीमतों पर बेचा गया, जिससे वधावन परिवार ने भारी मुनाफा कमाया। यह मुनाफा बाद में संदिग्ध लेनदेन के जरिए अन्य खातों में स्थानांतरित किया गया।
फर्जी देनदारी का षड्यंत्र
ED की जांच में यह पाया गया कि वनीता वधावन और M/s Al Jalore Trading FZE के बीच एक फर्जी लोन समझौता दिखाया गया था। इस समझौते के तहत संपत्ति को गिरवी रखकर देनदारी खड़ी की गई। यह एक जटिल वित्तीय षड्यंत्र था, जिसमें कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को शामिल किया गया। इस तरह के फर्जी समझौतों के माध्यम से, वधावन परिवार ने बड़ी रकम उधार दिखाई और फिर उसे अन्यत्र स्थानांतरित कर दिया।
फंड डाइवर्जन की तकनीक
हर्टमोर हाउस की बिक्री से प्राप्त राशि वनीता वधावन को देने के बजाय, ‘Al Jalore Trading FZE’ के भारत स्थित बैंक खाते में ट्रांसफर की गई। इसका उद्देश्य DHFL से जुड़ी देनदारियों का निपटान था। यह तकनीक दिखाती है कि कैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंक खातों का उपयोग कर धन को छुपाया जा सकता है। इस प्रक्रिया में कई बार नकली कंपनियों और खातों का इस्तेमाल होता है, ताकि किसी भी जांच एजेंसी को सीधे तौर पर कुछ न मिले।
आम आदमी पर असर
इस घोटाले का असर भारतीय बैंकिंग प्रणाली और आम ग्राहकों पर पड़ सकता है। बैंक फ्रॉड के चलते बैंकों की वित्तीय स्थिति पर असर देखने को मिल सकता है। इससे बैंकिंग सेवा की विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लग सकता है। जब बैंकों का पैसा फंसा होता है, तो वह आम उपभोक्ताओं को कर्ज देने में सावधानी बरतते हैं। इसके परिणामस्वरूप, छोटे व्यवसायों और व्यक्तिगत ग्राहकों को ऋण प्राप्ति में कठिनाई हो सकती है।
आगे की कार्रवाई
ED ने घोटाले की जड़ तक पहुंचने के लिए अपनी जांच प्रक्रिया तेज कर दी है। उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी गिरफ्तारी और संपत्ति जब्ती की जा सकती हैं। इसके अलावा, यह मामला न्यायालय में भी अपनी गहराई तक जाएगा। जांच एजेंसियां लगातार नए सुरागों की तलाश में हैं। इससे जुड़े कई अन्य लोगों की संलिप्तता पर भी सवाल उठ रहे हैं, जो आने वाले दिनों में स्पष्ट हो सकते हैं।
वित्तीय प्रणाली पर प्रभाव
इस तरह के घोटाले वित्तीय प्रणाली की कमजोरी को उजागर करते हैं। इससे निवेशकों की धारणा प्रभावित होती है। बैंकिंग सेक्टर में सुधार और पारदर्शिता की आवश्यकता को रेखांकित करते हैं। इस मामले ने भारत में वित्तीय नियामकों के लिए नई चुनौतियाँ खड़ी कर दी हैं। इसी कारण से, नियामक संस्थाएं अधिक सतर्क हो गई हैं।



