आप सांसद संजय सिंह ने दिल्ली पुलिस की बदसलूकी पर राज्यसभा समिति को पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस अधिकारियों के खिलाफ विशेषाधिकार हनन की गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। इस पत्र में उन्होंने पुलिस द्वारा 2, 10 और 12 अक्टूबर 2026 को मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) और वोट चोरी के आरोपों के विरोध में किए गए शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान उनके साथ हुई बदसलूकी का ब्योरा दिया है।
दिल्ली पुलिस ने सांसद संजय सिंह के साथ किया कथित बदसलूकी
संजय सिंह ने अपने पत्र में दिल्ली पुलिस आयुक्त, जाफरपुर थाना प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मियों पर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने 11 दिनों में तीन बार प्रदर्शन के दौरान सांसद के साथ जबरन हिरासत, धमकी, घसीटना और गर्दन खींचने जैसे कृत्यों को अंजाम दिया। सिंह ने स्पष्ट किया कि वे कोई अपराधी या आतंकवादी नहीं हैं, बल्कि देश के सांसद हैं, और लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन उनका संवैधानिक अधिकार है।
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इस कार्रवाई को उन्होंने पुलिस के द्वारा उनके विशेषाधिकारों का उल्लंघन बताया है और राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति से तुरंत हस्तक्षेप और जांच की मांग की है।

मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण से जुड़ा विरोध प्रदर्शन
यह विवाद मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित अनियमितताओं को लेकर शुरू हुआ है। आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने आरोप लगाया है कि इस प्रक्रिया में वोट चोरी की आशंका है, जिसके विरोध में शांतिपूर्ण प्रदर्शन किए गए।
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को बिना अनुमति के प्रदर्शन करने और शांति भंग करने के आरोप में रोकने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शनकारियों की कार्रवाई उनके ड्यूटी में बाधा डाल रही थी, जिसके कारण पुलिस ने एहतियाती कदम उठाए।
सांसद संजय सिंह की शिकायत और आगे की कार्रवाई
संजय सिंह ने राज्यसभा के उपसभापति एवं विशेषाधिकार समिति के अध्यक्ष हरिवंश को लिखे पत्र में पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि वे समिति के समक्ष अपने पास मौजूद सभी साक्ष्य प्रस्तुत करेंगे।
साथ ही, उन्होंने यह भी बताया कि दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ अदालत में एफआईआर दर्ज कराने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी ताकि न्याय सुनिश्चित किया जा सके। यह कदम पुलिस के रवैये पर सवाल उठाता है और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

पुलिस की प्रतिक्रिया और स्थिति
दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रदर्शनकारियों द्वारा बिना अनुमति के इलाके में प्रवेश करने और शांति भंग करने के कारण आवश्यक कार्रवाई की गई। पुलिस ने बताया कि उनका उद्देश्य कानून व्यवस्था बनाए रखना था।
हालांकि, पुलिस ने सांसद संजय सिंह के साथ हुई कथित बदसलूकी की घटनाओं पर अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। पुलिस ने कहा कि सभी पक्षों की शिकायतों को जांच के बाद उचित कार्रवाई की जाएगी।
राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति की भूमिका
राज्यसभा की विशेषाधिकार समिति संसदीय सदस्यों के विशेषाधिकारों और हनन से जुड़े मामलों की जांच करती है। इस मामले में, समिति 15 सदस्यों की है और संजय सिंह की शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर सकती है।
समिति के अध्यक्ष हरिवंश को भेजे गए पत्र के आधार पर यह माना जा रहा है कि पुलिस अधिकारियों के खिलाफ उचित अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी। यह प्रक्रिया संसद के सदस्यों के अधिकारों की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाती है।
लोकतंत्र और संवैधानिक अधिकारों पर असर
यह मामला लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन के अधिकार और पुलिस की भूमिका के बीच संतुलन को लेकर बहस को फिर से उभार रहा है। सांसद संजय सिंह का आरोप है कि पुलिस ने संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन किया है।
आम आदमी पर इसका प्रभाव भी पड़ सकता है क्योंकि विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा हैं। इस घटना से यह सवाल उठता है कि पुलिस और प्रशासन विरोध प्रदर्शनों को किस हद तक नियंत्रित कर सकते हैं बिना संवैधानिक अधिकारों को बाधित किए।



