इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए 6365 पेड़ कटेंगे, जिससे लगभग 5,000 तोतों का आवास खतरे में पड़ गया है। इस परियोजना के पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) में यह खुलासा हुआ है कि कुल 6,365 पेड़ प्रभावित होंगे, जिनमें से 5,121 पेड़ एलिवेटेड कॉरिडोर में और 1,244 पेड़ भूमिगत सेक्शन में आते हैं।
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत पेड़ों की कटाई पर हाईकोर्ट ने रोक लगाई
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच ने रानी सराय इलाके में पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन पर अंतरिम रोक लगा रखी है। यह रोक ‘‘पीपुल फॉर एनिमल्स’’ और ‘‘नेचर वॉलिंटियर सोसाइटी’’ द्वारा दायर याचिकाओं के बाद आई है। कोर्ट ने इस क्षेत्र के पुराने पेड़ों को बचाने के निर्देश दिए हैं, क्योंकि ये पेड़ 50-60 साल पुराने हैं और इनके ऊपर लगभग 5,000 तोते और अन्य पक्षी रहते हैं।
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तोतों के आवास पर इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट का गंभीर प्रभाव
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के मार्ग में आने वाले पुराने पेड़ों पर लाखों तोते और पक्षी आश्रय करते हैं। विशेषकर रीगल तिराहा और रानी सराय क्षेत्र के पेड़ तोतों का प्राकृतिक आवास हैं। इनके कटने से स्थानीय पक्षी समुदाय पर संकट उत्पन्न होगा। पर्यावरणविद और पक्षी संरक्षणकर्ता इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि इससे जैव विविधता को गंभीर नुकसान हो सकता है।
मेट्रो कंपनी ने वैकल्पिक मार्गों का तकनीकी मूल्यांकन किया
कोर्ट के आदेशों के बाद इंदौर मेट्रो रेल कंपनी ने रीगल टॉकीज, प्रीतमलाल दुआ सभागार और गांधी हॉल को वैकल्पिक स्टेशन बनाने के विकल्पों का तकनीकी विश्लेषण किया। हालांकि, कंपनी ने हाईकोर्ट में बताया कि अगर रानी सराय से स्टेशन शिफ्ट किया जाता है या रूट बदला जाता है, तो प्रोजेक्ट की लागत में लगभग ₹400 करोड़ की बढ़ोतरी होगी। साथ ही, निर्माण कार्य में 3 से 4 साल की देरी हो सकती है।
पर्यावरण संरक्षण के लिए ADB को आवेदन भेजा गया
पर्यावरण संरक्षण और तोतों के आवास के संभावित खतरे को लेकर अधिवक्ताओं और पर्यावरणविदों ने एशियाई विकास बैंक (ADB) के भारत कार्यालय को भी औपचारिक ज्ञापन भेजा है। उन्होंने मेट्रो प्रोजेक्ट के पर्यावरण प्रभावों की पुनः समीक्षा और संरक्षण उपायों की मांग की है। ADB इस परियोजना का वित्तपोषक है, इसलिए उसकी संवेदनशीलता अहम मानी जा रही है।
आम जनता और पर्यावरण दोनों पर संभावित असर
इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट से शहर में बेहतर यातायात सुविधा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, पेड़ों की कटाई और तोतों के आवास के नुकसान से पर्यावरणीय असंतुलन हो सकता है। इससे स्थानीय लोगों के लिए स्वच्छ हवा और पर्यावरण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इसलिए संतुलित विकास की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
आगे क्या हो सकता है इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट में
हाईकोर्ट की रोक और पर्यावरण संरक्षण की मांगों के बीच मेट्रो प्रोजेक्ट के मार्ग और निर्माण में बदलाव संभव हैं। प्रोजेक्ट प्रबंधन को लागत और समय में वृद्धि का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल, पेड़ों की कटाई पर रोक बनी हुई है और वैकल्पिक विकल्पों पर चर्चा जारी है। भविष्य में पर्यावरण संरक्षण के लिए और अधिक कड़े नियम लागू हो सकते हैं।



