इंदौर मेट्रो प्रोजेक्ट के तहत रानी सराय क्षेत्र में पेड़ों की कटाई और पक्षियों के संरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। इस पर्यावरणीय विवाद में लगभग 160 पेड़ों और सैकड़ों पक्षियों के आवास की सुरक्षा मुख्य मुद्दा बना हुआ है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने मेट्रो स्टेशन निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई को लेकर दलीलें सुनीं। दोनों पक्षों के तर्कों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने फिलहाल अपना फैसला सुरक्षित रखने का निर्णय लिया। इससे पहले जनवरी 2026 में इस मामले में अंतरिम रोक भी लगाई गई थी।
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कोर्ट ने मेट्रो प्रबंधन से पूछा कि क्या रानी सराय के अलावा कोई अन्य विकल्प उपलब्ध है, जैसे कि रीगल टॉकीज के खाली परिसर का इस्तेमाल। यह सवाल पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ परियोजना की जरूरतों को संतुलित करने की कोशिश को दर्शाता है।

रानी सराय में प्रभावित पेड़ों और पक्षियों का विवरण
मेट्रो प्रोजेक्ट के कारण रानी सराय क्षेत्र में कुल 217 पेड़ों में से लगभग 160 पुराने और परिपक्व पेड़ों को काटा या हटाया जाना है। ये पेड़ हरे तोतों के प्रमुख प्राकृतिक आवास हैं, जो वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आते हैं। इसके अलावा, सैकड़ों अन्य पक्षियों का भी यहां प्राकृतिक आवास है।
इस क्षेत्र के पेड़ और पक्षी, स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इसलिए इनके संरक्षण की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है।
याचिकाकर्ता और पर्यावरण संस्थाओं की भूमिका
इस मामले में ‘पीपल फॉर एनिमल्स’ की इंदौर इकाई के अध्यक्ष प्रियांशु जैन ने जनहित याचिका दायर की है। साथ ही, ‘द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी’ के अध्यक्ष पद्मश्री भालू मोंढे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हस्तक्षेप आवेदन दिया है।
पर्यावरण संगठनों ने पेड़ों और पक्षियों के संरक्षण के लिए गहराई से वैज्ञानिक सर्वे की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ एक दिन की सरकारी निरीक्षण रिपोर्ट पर्याप्त नहीं है।

स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वे की मांग पर जोर
‘द नेचर वॉलंटियर्स’ ने पक्षियों के कोटरों और घोंसलों के वैज्ञानिक मूल्यांकन के लिए स्वतंत्र एवियन इकोलॉजिस्ट की मदद से विस्तृत सर्वेक्षण की मांग की है। यह सर्वे पर्यावरणीय नुकसान का सही आकलन करने में मदद करेगा।
संस्था का तर्क है कि परियोजना की अनुमति के बाद भी पर्यावरण संरक्षण आवश्यक है, जिससे पक्षियों और पेड़ों की उचित क्षतिपूर्ति हो सके।
इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन का पक्ष
इंदौर मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन ने कोर्ट में कहा कि प्रोजेक्ट के लिए सभी आवश्यक अनुमतियां पहले ही प्राप्त कर ली गई हैं। साथ ही, उन्होंने पेड़ों और पक्षियों की क्षतिपूर्ति के लिए नगर निगम में लगभग 3 करोड़ रुपये जमा कराए हैं।
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि वे पर्यावरण सुरक्षा नियमों का पालन कर रहे हैं और परियोजना में पर्यावरण संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।
मेट्रो प्रोजेक्ट का आम आदमी पर प्रभाव
रानी सराय में मेट्रो स्टेशन बनने से यातायात और आवागमन में सुधार होगा। हालांकि, पेड़ों की कटाई और पक्षियों के आवास के नुकसान से स्थानीय पर्यावरण प्रभावित हो सकता है।
इसलिए पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है, ताकि शहर में स्वच्छ हवा और जैव विविधता बनी रहे।



