इंदौर में 23 सितंबर 2026 को व्यापारी संगठनों ने ‘नो यूपीआई डे’ मनाया। इस दिन व्यापारी अपने क्यूआर कोड और यूपीआई बारकोड बॉक्स को काले कपड़े से ढंककर डिजिटल भुगतान के विरोध में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे हैं। यह विरोध प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ है, जो 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई लेन-देन पर लागू होने वाला है।
व्यापारियों ने काले कपड़े से यूपीआई बारकोड को ढककर जताया विरोध
इंदौर के प्रमुख बाजारों में व्यापारी अपने यूपीआई क्यूआर कोड, स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस प्रतीकात्मक कदम के जरिए वे सरकार के प्रस्तावित मर्चेंट सरचार्ज के खिलाफ अपनी नाराजगी दिखा रहे हैं। केवल नकद भुगतान स्वीकार करके व्यापारी अपनी चिंता ग्राहकों तक पहुंचा रहे हैं।
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अहिल्या चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के नेतृत्व में 125 से अधिक व्यापारिक संगठनों और लगभग 2 लाख व्यापारियों ने इस आंदोलन में हिस्सा लिया है।
मर्चेंट डिस्काउंट रेट के खिलाफ व्यापारियों का विरोध
व्यापारी इस प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट को अपने लिए घाटे का सौदा मानते हैं। उनका तर्क है कि पहले से ही क्रेडिट और डेबिट कार्ड लेन-देन पर 18% जीएसटी चुकानी पड़ती है। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क खुदरा कारोबार की लागत बढ़ाएगा।
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अक्षय जैन ने कहा कि इस शुल्क से छोटे व मध्यम व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग की है।
ग्राहकों से सहयोग की अपील और व्यापक प्रचार
व्यापारियों ने सोशल मीडिया और बाजारों में पोस्टर लगाकर ग्राहकों से हाथ जोड़कर अपील की है कि वे ‘नो यूपीआई डे’ के दौरान यूपीआई का इस्तेमाल न करें। इसका उद्देश्य विरोध को शांतिपूर्ण और सामूहिक रूप से दर्शाना है।
कुछ प्रमुख बाजारों जैसे राजवाड़ा, सियागंज, मारोठिया और सराफा में व्यापारियों ने नकद भुगतान को प्राथमिकता दी है। कई व्यापारिक संगठनों ने इस अभियान को समर्थन दिया है।
इंदौर में यूपीआई लेन-देन के आंकड़े और महत्व
अगस्त 2026 में इंदौर में 11,329 करोड़ रुपए के 9.33 करोड़ यूपीआई ट्रांजेक्शन हुए। इनमें से 2,265 करोड़ रुपए से अधिक की राशि 2,000 रुपये से ऊपर के लेन-देन की है, जो नई मर्चेंट डिस्काउंट रेट के दायरे में आता है।
यह आंकड़ा दर्शाता है कि इंदौर प्रदेश में यूपीआई इस्तेमाल में अग्रणी है। इसलिए व्यापारी इस क्षेत्र में प्रभावी विरोध कर रहे हैं।
व्यापारियों के अनुसार सरकार की नीति से होगा नुकसान
व्यापारी संगठनों का मानना है कि प्रस्तावित शुल्क से कारोबार की लागत बढ़ेगी। वे कहते हैं कि यह बोझ अंततः ग्राहकों पर भी पड़ेगा क्योंकि व्यापारी लागत बढ़ाने पर मजबूर होंगे।
अहिल्या चैंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल ने कहा कि सरकार को व्यापारियों की चिंताओं को समझना चाहिए और एक स्पष्ट, व्यापार हितैषी नीति बनानी चाहिए।
आगे की संभावनाएं और आंदोलन की व्यापकता
विरोध के चलते सरकार पर दबाव बढ़ सकता है। यदि व्यापारी संगठन अपनी मांगों पर अड़ेंगे तो व्यापक स्तर पर यह आंदोलन और प्रभावी हो सकता है।
इस संघर्ष से व्यापारियों की वित्तीय मजबूरियां और आम जनता की डिजिटल भुगतान की आदतों पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए इस मुद्दे पर संतुलित और संवेदनशील निर्णय की आवश्यकता है।



