पराग्वे में बैंक संकट ने देश की राजनीति में भूचाल ला दिया है। राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को उनकी गंभीर भूमिका के कारण पद से हटाकर हाउस अरेस्ट में रखा गया है। यह बैंक संकट मुख्य रूप से यूएनो बैंक के पतन से जुड़ा है, जिसने लाखों ग्राहकों की जमा पूंजी को खतरे में डाल दिया।
यूएनो बैंक के पतन से शुरू हुआ बैंक संकट
पराग्वे के केंद्रीय बैंक ने 3 नवंबर 2026 को यूएनो बैंक की वित्तीय अनियमितताओं और पूंजी की कमी के चलते नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। यूएनो बैंक देश का सबसे बड़ा डिजिटल बैंक था, जिसका कारोबार तेजी से बढ़ रहा था। हालांकि, जांच में पता चला कि बैंक ने अपने मालिकों से जुड़ी कंपनियों को बड़े पैमाने पर जोखिम भरे कर्ज दिए।
बैंक के कामकाज ठप होने से लगभग 30 लाख ग्राहक प्रभावित हुए, जो देश की आधी आबादी के बराबर है। बैंक की सेवा बंद होने से लोगों की जमा पूंजी फ्रीज हो गई और पेंशनभोगियों के कोष भी अटके।
राष्ट्रपति सैंटियागो पेना का इस्तीफा और संसद की प्रतिक्रिया
बैंक संकट के बढ़ते दबाव के बीच 5 नवंबर को राष्ट्रपति सैंटियागो पेना ने इस्तीफा देने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने देश की स्थिरता बनाए रखने के लिए यह कदम उठाने की बात कही। हालांकि, संसद ने उनका इस्तीफा स्वीकार करने से इनकार कर दिया।
संसद में विपक्ष ने तर्क दिया कि इस्तीफा स्वीकार होने पर पेना को आजीवन कानूनी संरक्षण मिल सकता था। इसलिए महाभियोग की प्रक्रिया के जरिये उन्हें पद से हटाना जरूरी था।
महाभियोग के बाद सैंटियागो पेना की बर्खास्तगी
6 नवंबर 2026 को पराग्वे के सीनेट ने सर्वसम्मति से पेना को पद के दुरुपयोग और गंभीर लापरवाही के आरोप में बर्खास्त कर दिया। सभी 44 सांसदों ने उनके खिलाफ वोट दिया। इस निर्णय के बाद उपराष्ट्रपति पेड्रो अलियाना ने तत्काल राष्ट्रपति पद की शपथ ली।
पेड्रो अलियाना अगस्त 2028 तक शेष कार्यकाल के लिए देश का नेतृत्व संभालेंगे। यह बदलाव पराग्वे की राजनीतिक स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।

सैंटियागो पेना के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और हाउस अरेस्ट
महाभियोग के बाद लोक अभियोजन कार्यालय ने पेना के खिलाफ आपराधिक जांच शुरू कर दी। उन पर विश्वासघात, पद का दुरुपयोग, प्रभाव का गलत इस्तेमाल और मनी लॉन्ड्रिंग के गंभीर आरोप हैं। खासतौर पर यूएनो बैंक में सरकारी और पेंशन फंड के अनियमित ट्रांसफर का मामला सामने आया है।
6 नवंबर को पुलिस ने असुन्सियोन में पेना के आवास पर जाकर उन्हें हाउस अरेस्ट में रखा। इस दौरान उन्हें स्वतंत्र रूप से बाहर जाने की अनुमति नहीं है और जांच जारी है।
बैंक संकट का आम जनता पर गहरा असर
यूएनो बैंक के पतन से प्रभावित ग्राहकों की संख्या लगभग 30 लाख है। इनमें बड़ी संख्या में पेंशनभोगी और आम जनता शामिल है, जिनकी जमा पूंजी और पेंशन फंड फ्रीज हो गए। इससे लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हुई है।
सरकार ने आपातकालीन कदम उठाते हुए प्रभावित खाताधारकों को मुआवजा देने की योजना बनाई है। छोटे खातों वाले ग्राहकों को जमा राशि की वापसी शुरू कर दी गई है। हालांकि, संकट के प्रभाव से उबरने में समय लगेगा।
पराग्वे में बैंक संकट के बाद राजनीतिक और आर्थिक भविष्य
यूएनो बैंक के पतन ने पराग्वे में वित्तीय प्रणाली की कमजोरियों को उजागर किया है। इस संकट ने राजनीतिक नेतृत्व को भी चुनौती दी है, जिसका परिणाम राष्ट्रपति की बर्खास्तगी के रूप में सामने आया।
आगे सरकार को बैंकिंग नियमों को सख्त करना होगा और वित्तीय संस्थानों की निगरानी बेहतर बनानी होगी। पेड्रो अलियाना के नेतृत्व में नई सरकार को बैंकिंग संकट से उबरने और जनता का भरोसा बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।



