मेघालय में बड़ा राजनीतिक संकट तब पैदा हुआ जब यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी (UDP) के 11 विधायकों ने पार्टी छोड़ दी। यह घटना राज्य की सियासी तस्वीर में बड़े बदलाव का संकेत देती है। UDP के विधायकों के इस कदम से पार्टी की स्थिति कमजोर हो गई है और विधानसभा में दलीय समीकरण भी पूरी तरह से बदल गए हैं।
UDP के 11 विधायकों का दल-बदल और पार्टियों में विलय
मेघालय विधानसभा में कुल 12 UDP विधायक हैं, जिनमें से 11 ने पार्टी छोड़कर अन्य दलों में शामिल हो गए हैं। इनमें से 8 विधायक भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हुए हैं, जबकि 3 विधायक ने मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा की नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) का दामन थाम लिया। यह बदलाव विधानसभा के राजनीतिक समीकरणों को गहराई से प्रभावित कर रहा है।
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मेघालय विधानसभा अध्यक्ष थॉमस ए. संगमा ने इन दोनों विलयों को औपचारिक रूप से मान्यता दे दी है, जो कि 10वीं अनुसूची के तहत विधायकों के दल-बदल को वैध बनाता है। इससे पहले भी 16 अक्टूबर को BJP में विलय को मंजूरी मिली थी।
UDP अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह का मंत्री पद से इस्तीफा
11 विधायकों के पार्टी छोड़ने के बाद UDP के अध्यक्ष और बिजली, जल संसाधन, वस्त्र तथा कराधान मंत्री मेटबाह लिंगदोह ने 31 अक्टूबर 2026 को मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस (MDA) सरकार के कैबिनेट मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने यह निर्णय पार्टी की राजनीतिक स्थिति और नैतिक आधारों को ध्यान में रखकर लिया।
मेटबाह ने कहा कि जब उनकी पार्टी का केवल एक विधायक सदन में बचे हैं, तो कैबिनेट मंत्री के पद पर बने रहना उचित नहीं है। उन्होंने अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा को सौंप दिया, जो तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
UDP के अंदर राजनीतिक संकट और पार्टी की स्थिति
UDP कभी मेघालय के खासी-जयंतिया हिल्स क्षेत्र की सबसे बड़ी क्षेत्रीय पार्टी के रूप में उभरी थी। 2023 के विधानसभा चुनावों में पार्टी ने 12 सीटें जीती थीं और किंगमेकर की भूमिका निभाई थी। हालांकि, अब तीन साल के भीतर पार्टी के भीतर मची टूट ने इसे अस्तित्व के संकट में डाल दिया है।
11 विधायकों के चले जाने के बाद अब UDP के पास विधानसभा में केवल एक विधायक बचा है, जो पार्टी अध्यक्ष मेटबाह लिंगदोह हैं। यह घटना मेघालय की राजनीतिक स्थिरता पर भी प्रभाव डाल रही है।
मेघालय विधानसभा में बदले हुए दलीय समीकरण
इस राजनीतिक फेरबदल के बाद मेघालय विधानसभा के दलीय समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। अब मुख्य सत्तारूढ़ दल NPP की सीटें बढ़कर 36 हो गई हैं, जबकि BJP के विधायक संख्या 10 तक पहुंच गए हैं। UDP लगभग प्रभावहीन हो गई है।
यह बदलाव राज्य की सत्ता संरचना को मजबूत करता है, लेकिन साथ ही विपक्ष के कमजोर होने से लोकतांत्रिक संतुलन पर प्रश्नचिह्न भी लगाते हैं। राजनीतिक दलों के लिए यह एक चुनौतीपूर्ण दौर है।
आम जनता पर राजनीतिक संकट के प्रभाव
मेघालय में UDP के विधायकों के पार्टी छोड़ने और राजनीतिक संकट के कारण आम लोगों की उम्मीदें प्रभावित हो सकती हैं। राजनीतिक अस्थिरता से विकास कार्यों में बाधा आ सकती है।
इसके अलावा, क्षेत्रीय मुद्दों और जनप्रतिनिधित्व की गुणवत्ता पर भी असर पड़ने की संभावना है। इसलिए राजनीतिक दलों को सावधानी से इस स्थिति को संभालना होगा ताकि राज्य की सामाजिक-आर्थिक प्रगति प्रभावित न हो।
आगे क्या हो सकता है UDP का भविष्य?
UDP के नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि पार्टी की केंद्रीय कार्यकारिणी समिति जल्द इस स्थिति पर विचार करेगी। पार्टी नेताओं और पदाधिकारियों के बीच चर्चा के बाद भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।
हालांकि UDP के लिए यह समय चुनौतीपूर्ण है, लेकिन राजनीतिक पुनर्गठन के जरिए पार्टी अपनी स्थिति सुधारने की कोशिश कर सकती है। राज्य की राजनीति में इस बदलाव के परिणाम आने वाले महीनों में स्पष्ट होंगे।



