जेपी नड्डा का राहुल गांधी पर तीखा हमला राजनीति के तरीके को लेकर चर्चा में है। 1 नवंबर 2026 को नई दिल्ली के रामलीला मैदान में आयोजित INDIA गठबंधन की ‘चलो दिल्ली’ रैली के दौरान भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जे.पी. नड्डा ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी की राजनीति पर गंभीर आरोप लगाए।
राहुल गांधी की राजनीति के चार चरणों की व्याख्या
जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के राजनीति मॉडल को चार चरणों में विभाजित किया। उन्होंने कहा कि पहला चरण झूठ और अफवाहें फैलाने का है, जिससे जनता में भ्रम पैदा होता है। दूसरा चरण सड़कों पर अराजकता और उपद्रव को बढ़ावा देना है, जो सामाजिक व्यवस्था को प्रभावित करता है। तीसरा चरण देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना बताकर, त्योहारों और बाजारों को प्रभावित करने का आरोप लगाया। चौथा चरण विदेशी ताकतों के इशारे पर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने का प्रयास करना बताया।
👉 यह भी पढ़ें:
- भाजपा का विपक्ष पर तंज: राहुल गांधी को बनाए रखें जीवनभर ‘मॉक प्रधानमंत्री’
- कांग्रेस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बनी रामलीला मैदान की रैली, कल होगा विपक्ष का बड़ा इम्तिहान
- दिल्ली में खड़गे के घर पर जुटा INDIA गठबंधन, CEC ज्ञानेश कुमार पर महाभियोग
- राहुल गांधी के दिल्ली मार्च पर फंसा पेंच, पुलिस ने अनुमति न मिलने की बात कही
- सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर हमला, लगाया लोकतांत्रिक परंपरा कमजोर करने का आरोप
- भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन का कांग्रेस पर हमला, कहा- राहुल गांधी की बात मानते रहो, पार्टी खत्म हो जाएगी

रामलीला मैदान की रैली को लेकर नड्डा की तीखी टिप्पणी
नड्डा ने INDIA गठबंधन की रैली को ‘लोकतंत्र के नाम पर अराजकता फैलाने का नाटक’ करार दिया। उन्होंने कहा कि भारत कोई “बनाना रिपब्लिक” नहीं है, जहां कोई अपनी मर्जी से दंगे और आगजनी कर सत्ता परिवर्तन का एजेंडा चला सके। यह बयान भारत के लोकतंत्र की मजबूती पर जोर देता है और विपक्ष के राजनीतिक तरीकों पर सवाल उठाता है।
1984 के सिख विरोधी दंगों को लेकर नड्डा का आरोप
जेपी नड्डा ने 1 नवंबर की तारीख को लेकर कांग्रेस पर कटाक्ष किया। उन्होंने कहा कि यह दिन 1984 के सिख विरोधी दंगों का काला इतिहास है। नड्डा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने सिख समुदाय के पुराने जख्मों को फिर से उकेरने का कार्य किया है, जो संवेदनशीलता की कमी दर्शाता है। यह बयान विपक्ष पर भावनात्मक राजनीति करने का आरोप लगाता है।

विपक्ष की रैली का असर और सुरक्षा व्यवस्था
दिल्ली पुलिस ने रामलीला मैदान और आसपास के इलाकों में कड़े सुरक्षा इंतजाम किए हैं। करीब दस हजार सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, जिसमें सीआरपीएफ और रैपिड एक्शन फोर्स के जवान शामिल हैं। इसके अलावा, ड्रोन और AI कैमरों से निगरानी की जा रही है। इस सुरक्षा व्यवस्था का मकसद रैली और विरोध प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बनाना है।
आर्थिक और सामाजिक प्रभाव पर नड्डा की चिंता
नड्डा ने त्योहारों के दौरान रैली आयोजित करने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि इससे छोटे दुकानदार, व्यापारी और सप्लाई चेन प्रभावित होती है। उन्होंने दावा किया कि चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री ने रैली टालने की अपील की थी। इसके साथ ही, उन्होंने विपक्ष पर देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने का गंभीर आरोप लगाया।
आगे की राजनीतिक स्थिति पर संभावित प्रभाव
जेपी नड्डा के इस हमले से राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है। विपक्षी दलों की मांगें और रैलियां जारी रहने की संभावना है। साथ ही, चुनाव आयोग के प्रति असंतोष भी गहरा रहा है। इससे आने वाले महीनों में राजनीतिक गतिरोध और भी तीव्र हो सकता है, जिसका असर आम जनता पर भी पड़ सकता है।



