राहुल गांधी के दिल्ली मार्च पर अटका पेंच तब लग गया जब पुलिस ने मार्च के लिए अनुमति न मिलने की बात कही। 1 नवंबर को प्रस्तावित इस मार्च और रैली को लेकर दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानूनी मुद्दों को कारण बताते हुए मार्च मार्ग पर पाबंदी जताई है।
राहुल गांधी के दिल्ली मार्च और रैली की योजना
राहुल गांधी और INDIA गठबंधन ने 1 नवंबर को दोपहर 12 बजे दिल्ली में ‘चलो दिल्ली’ पदयात्रा और जनसभा का आयोजन करने का ऐलान किया था। मार्च कनॉट प्लेस के मिंटो रोड जंक्शन से शुरू होकर अजमेरी गेट होते हुए रामलीला मैदान तक पहुंचने वाला था। इस रैली का मकसद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और कथित वोट चोरी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करना है।
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दिल्ली पुलिस ने अनुमति न मिलने की बात कही
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि रामलीला मैदान में रैली के लिए NOC और सशर्त अनुमति तो पहले ही मिल चुकी है, लेकिन कनॉट प्लेस से रामलीला मैदान तक पैदल मार्च निकालने के लिए कोई औपचारिक आवेदन या अनुमति नहीं दी गई है। इसके चलते पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 का हवाला देते हुए भीड़ जमा करने और जुलूस निकालने पर रोक लगा दी है।
सुरक्षा व्यवस्था के कड़े इंतजाम
फिलहाल, दिल्ली पुलिस ने सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट और पैरामिलिट्री फोर्स की कई टुकड़ियों को रामलीला मैदान और उसके आसपास के इलाकों में तैनात कर दिया है। वरिष्ठ अधिकारियों ने मार्च मार्ग का निरीक्षण किया है ताकि सुरक्षा व्यवस्था सख्त हो और किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके। सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों की जांच भी जारी है।

व्यापारियों का विरोध और आम जनता पर असर
दिवाली के खरीदारी मौसम के चलते व्यापारियों का विरोध बढ़ गया है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) के चेयरमैन बृजेश गोयल ने राहुल गांधी से मार्च को स्थगित करने की अपील की है। इससे दिल्ली की आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ सकता है और आम जनता की दैनिक जीवनशैली प्रभावित हो सकती है।
कानूनी बाधाएं और आगे की संभावनाएं
धारा 163 के तहत बिना अनुमति भीड़ या जुलूस पर रोक लगाना कानूनी रूप से मान्य है। इस स्थिति में राहुल गांधी और उनके गठबंधन के लिए मार्च को पुनः योजना बनाना आवश्यक हो सकता है। आगे की कार्रवाई और बातचीत के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी कि मार्च को अनुमति मिलती है या नहीं।
राजनीतिक और सामाजिक संदर्भ
यह मार्च विपक्ष के लिए एक बड़ा राजनीतिक बयान माना जा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ इस्तीफे की मांग और alleged वोट चोरी के आरोपों को लेकर यह प्रदर्शन महत्वपूर्ण है। हालांकि, सुरक्षा और कानून व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस की रोक भी जायज है। इस घटना से राजधानी दिल्ली में राजनीतिक तनाव और सियासी हलचल बढ़ने की संभावना है।



