बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवात बनने लगा है, जिससे तीन राज्यों में तेज बारिश और तेज हवा की संभावना जताई गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, यह नया मौसम तंत्र ‘मुरसु’ नामक चक्रवाती तूफान के रूप में विकसित हो रहा है।
बंगाल की खाड़ी में नया चक्रवात ‘मुरसु’ का रूप लेना
दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में बना गहरा अवदाब (Deep Depression) अब चक्रवाती तूफान में तब्दील हो चुका है। मौसम विभाग ने इस तूफान का नाम ‘मुरसु’ रखा है, जो भारत द्वारा प्रस्तावित किया गया था। यह प्रणाली तेज हवाओं और भारी बारिश के साथ आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तमिलनाडु जैसे राज्यों को प्रभावित करेगी।
👉 यह भी पढ़ें:
- मध्य प्रदेश में अगले 4 दिन आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं, अमरकंटक में ठंडक बढ़ी
- अरब सागर से बंगाल की खाड़ी तक सक्रिय साइक्लोनिक सर्कुलेशन, 14 राज्यों में अलर्ट
- मध्य प्रदेश में 15 अक्टूबर से आंधी-बारिश का अलर्ट, किसानों और लोगों को सतर्क रहने की सलाह
- MP Weather Update: भोपाल-इंदौर में तेज धूप, शाम को ठंडी हवा की लहर
- मध्य प्रदेश के 6 जिलों में बारिश, अमरकंटक में डेढ़ इंच पानी गिरा
- मध्य प्रदेश के 19 जिलों में येलो अलर्ट, 30 सितंबर को गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना
तट से टकराने का अनुमान और हवा की रफ्तार
IMD के मुताबिक, यह चक्रवात 3 नवंबर 2026 की सुबह या तड़के आंध्र प्रदेश तट से टकराने की संभावना है। तट के पास पहुंचने पर हवा की गति 80 से 90 किलोमीटर प्रति घंटा तक रहने और झोंकों में 100 किलोमीटर प्रति घंटा तक पहुंचने की आशंका है। इस तेज़ हवा के चलते तटीय इलाकों में सुरक्षा उपायों को कड़ाई से लागू करने की जरूरत है।
तीन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी
मौसम विभाग ने आंध्र प्रदेश के रायलसीमा और तटीय क्षेत्रों में 2 और 3 नवंबर को भारी से बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है। वहीं, ओडिशा में 3 और 4 नवंबर को भारी बारिश होने की संभावना है। तमिलनाडु और पुडुचेरी में भी इस तूफान के कारण बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव महसूस किया जाएगा।
मछुआरों और स्थानीय लोगों को दी गई चेतावनी
बंगाल की खाड़ी में समुद्र की स्थिति खराब रहने के कारण मौसम विभाग ने मछुआरों को बुधवार 4 नवंबर की दोपहर तक समुद्र में न जाने की सलाह दी है। साथ ही, जो मछुआरे पहले से समुद्र में हैं, उन्हें तट पर लौट आने के निर्देश दिए गए हैं। स्थानीय प्रशासन भी सतर्कता बरत रहा है ताकि किसी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
चक्रवात ‘मुरसु’ की तुलना ‘अर्नब’ से
IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि ‘मुरसु’ चक्रवात ‘अर्नब’ की तुलना में कम तीव्र होगा। अर्नब ने हाल ही में 130 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तट को प्रभावित किया था और काफी तबाही मचाई थी। हालांकि, ‘मुरसु’ के कारण भी भारी बारिश और तेज हवा से नुकसान की संभावना बनी रहेगी।
आगे के हालात और संभावित प्रभाव
मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि यह चक्रवात पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए 2 से 3 नवंबर के बीच तट से टकराएगा। इसके बाद इसके प्रभाव से कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बन सकते हैं। प्रशासन को आपदा प्रबंधन के लिए तैयार रहना होगा। आम लोगों को भी मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करना चाहिए।



