भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने 1 से 30 नवंबर तक पदयात्रा का ऐलान किया है, जो पूरे देश में विरोधी गठबंधन ‘INDIA’ की दिल्ली में आयोजित महारैली के जवाब में आयोजित की जाएगी। इस पदयात्रा अभियान का मुख्य उद्देश्य विपक्ष के ‘वोट चोरी’ के आरोपों का खंडन करना है। बीजेपी इस अभियान को ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ के नारे के तहत चला रही है।
बीजेपी का पदयात्रा अभियान दो चरणों में होगा
बीजेपी ने इस पदयात्रा अभियान को दो चरणों में विभाजित किया है। पहला चरण 1 नवम्बर से 5 नवम्बर तक चलेगा, जबकि दूसरा चरण 11 नवम्बर से 30 नवम्बर तक आयोजित किया जाएगा। इस दौरान पार्टी के शीर्ष नेता और मुख्यमंत्री देश के विभिन्न हिस्सों में पदयात्रा निकालेंगे।
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यह अभियान विपक्ष के 1 नवंबर को रामलीला मैदान में आयोजित ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ महारैली के जवाब में है, जिसमें बीजेपी ने इसे लोकतंत्र और वोटर सूची प्रक्रिया (SIR) पर फैलाए जा रहे भ्रम को दूर करने का प्रयास बताया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की प्रमुख भूमिका
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह इस पदयात्रा अभियान में अहम भूमिका निभाएंगे। वे 2 नवंबर को हैदराबाद में पदयात्रा में शामिल होंगे और 5 नवंबर को हरियाणा के करनाल में पदयात्रा का नेतृत्व करेंगे। अमित शाह के नेतृत्व में यह अभियान विपक्ष की रैलियों के जवाब में सशक्त संदेश देने की कोशिश करेगा।
तेलंगाना के भाजपा अध्यक्ष एन रामचंदर राव ने कांग्रेस पर SIR प्रक्रिया के खिलाफ गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अराजकता फैलाने का प्रयास कर रहा है और बीजेपी इस पदयात्रा के माध्यम से लोकतंत्र की रक्षा करेगी।
मुख्यमंत्री और दिग्गज नेताओं की भागीदारी
इस पदयात्रा अभियान में कई दिग्गज नेता और मुख्यमंत्री भी शामिल होंगे। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 1 नवंबर को लखनऊ में पदयात्रा की अगुवाई करेंगे। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा शिमला में मार्च निकालेंगे। इसके अलावा रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन, केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी अलग-अलग राज्यों में पदयात्राओं का नेतृत्व करेंगे।
यह व्यापक स्तर पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और पार्टी की छवि को मजबूत करने के लिए अहम कदम माना जा रहा है।

जनता के करीब जाने की कोशिश
यह पदयात्रा अभियान सीधे तौर पर आम जनता से जुड़ा है क्योंकि यह वोटर सूची संशोधन प्रक्रिया (SIR) और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर केंद्रित है। बीजेपी का मानना है कि विपक्ष झूठे आरोप लगा कर मतदाताओं का भ्रम पैदा कर रहा है।
इस प्रकार के जनसंपर्क अभियान से जनता में जागरूकता बढ़ेगी और वे चुनावी प्रक्रिया में अपनी भूमिका के प्रति सजग होंगे। साथ ही, यह विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच जारी राजनीतिक टकराव को भी और तीव्र कर सकता है।
11 नवंबर से शुरू होगा दूसरा चरण
पहले चरण के बाद 11 नवंबर से दूसरे चरण की पदयात्रा शुरू होगी, जिसमें और अधिक स्थानों पर जनसभा, संवाद और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी की योजना है कि इस अभियान के जरिए विपक्ष की साजिशों को जनता के सामने बेनकाब किया जाए।
यदि यह अभियान सफल रहता है तो बीजेपी की जनाधार मजबूत हो सकती है और आगामी चुनावों में इसका सकारात्मक प्रभाव दिख सकता है। वहीं विपक्ष की रैलियों और आरोपों को चुनौती मिल सकती है।
राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में पदयात्रा का महत्व
देश के राजनीतिक माहौल में यह पदयात्रा महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली है। विपक्ष की महारैली के जवाब में बीजेपी का यह कदम राजनीतिक टकराव को दर्शाता है। ‘लोकतंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ’ का नारा पार्टी की रणनीति और संदेश को स्पष्ट करता है।
यह अभियान न केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को सक्रिय करेगा, बल्कि आम जनता के बीच भी भाजपा की छवि को सुदृढ़ करेगा। इससे आगामी चुनावों के लिए तैयारियों को भी गति मिलेगी।



