बिहार में निर्दलीय MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने 31 अक्टूबर 2026 को भाजपा का समर्थन किया। दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षद पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित विधानमंडल दल की बैठक में शामिल हुए और पार्टी में शामिल होकर अपना समर्थन दिया। यह कदम बिहार की राजनीति में महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है।
निर्दलीय MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने भाजपा में प्रवेश किया
बिहार में निर्दलीय MLC राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने भाजपा का समर्थन कर पार्टी में शामिल होने का फैसला किया। राहुल राज ने सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। वे पहले भाजपा के सदस्य थे, लेकिन टिकट ना मिलने पर बागी होकर निर्दलीय चुनाव लड़े थे जिससे उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था। वहीं, बंशीधर ब्रजवासी तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय चुनाव जीतकर भाजपा में शामिल हुए।
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एमएलसी चुनाव में JDU के उम्मीदवारों को हराकर मिली जीत
राहुल राज ने सारण शिक्षक सीट पर एनडीए सहयोगी JDU के आनंद पुष्कर को शिकस्त दी। वहीं, बंशीधर ब्रजवासी ने तिरहुत स्नातक सीट से JDU के अभिषेक झा को हराया। यह दोनों निर्दलीय प्रत्याशी जेडीयू के उम्मीदवारों को पराजित कर विधानसभा परिषद में भाजपा और एनडीए की स्थिति को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई।
भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित बैठक में शामिल हुए दोनों MLC
31 अक्टूबर को पटना में भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित पार्टी के विधानमंडल दल की बैठक में बिहार के उपमुख्यमंत्री और भाजपा नेता सम्राट चौधरी तथा प्रदेश प्रभारी हरीश द्विवेदी की मौजूदगी में राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी को पार्टी में शामिल कराया गया। दोनों नेताओं को पार्टी का पटका पहनाकर और गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया।

विधान परिषद में भाजपा और NDA की स्थिति हुई मजबूत
दो निर्दलीय MLC के भाजपा में शामिल होने से बिहार विधान परिषद में भाजपा और एनडीए गठबंधन की स्थिति मजबूत हो गई है। इससे सत्ताधारी गठबंधन को विधायी प्रक्रियाओं में और अधिक समर्थन प्राप्त होगा। भाजपा के लिए यह राजनीतिक मजबूती का संकेत है, जबकि जेडीयू के लिए यह चुनौती भी बनी हुई है।
राहुल राज की पार्टी में वापसी का राजनीतिक महत्व
राहुल राज की भाजपा में वापसी को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वे पहले भी भाजपा का हिस्सा थे, लेकिन टिकट ना मिलने पर बगावत की थी। अब पार्टी में लौटकर उन्होंने अपने राजनीतिक करियर को मजबूत किया है। इससे संगठन में भी स्थिरता आने की उम्मीद जताई जा रही है।
आगे की राजनीतिक संभावनाएं और प्रभाव
दोनों निर्दलीय MLC का भाजपा में शामिल होना बिहार की राजनीति में नए समीकरण बनाने वाला कदम है। इससे आगामी चुनावों और राजनीतिक गठबंधनों पर असर पड़ेगा। इसके अलावा, यह भाजपा को स्थानीय स्तर पर और अधिक मजबूती प्रदान करेगा। आम जनता के लिए भी यह विकास कार्यों और नीतियों में बेहतर समन्वय का अवसर हो सकता है।



