धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ धनबाद में धार्मिक भावनाएं भड़काने का मामला दर्ज किया गया है। यह मामला मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) की अदालत में एक शिकायतवाद के रूप में दर्ज हुआ है।
शिकायतकर्ता ने धनबाद CJM कोर्ट में याचिका दायर की
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ यह शिकायत नवंबर 2026 के पहले सप्ताह में धनबाद के भागा बांध निवासी मिथुन यादव द्वारा दायर की गई। इसमें आरोप लगाया गया कि शास्त्री ने मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करैरा में भगवान श्रीकृष्ण और वृंदावन को लेकर एक धार्मिक प्रवचन के दौरान आपत्तिजनक टिप्पणी की।
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मिथुन यादव ने अदालत में याचिका प्रस्तुत करते हुए कहा कि इस टिप्पणी से करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। साथ ही उन्होंने सोशल मीडिया वीडियो रिकॉर्डिंग और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य अदालत को सौंपे हैं।

आरोपों का केंद्र भगवान श्रीकृष्ण और वृंदावन
शिकायत में कहा गया है कि धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने करैरा में अपने कथन में भगवान श्रीकृष्ण की शारीरिक मुद्राओं की तुलना करते हुए उनकी धार्मिक छवि को ठेस पहुंचाई है। यह टिप्पणी श्रद्धालुओं की आस्था और धार्मिक भावनाओं के विरुद्ध मानी जा रही है।
भगवान कृष्ण को भारतीय संस्कृति में एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। इसलिए इस प्रकार की विवादित टिप्पणियां सामाजिक विवादों को जन्म दे सकती हैं।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का बयान और सफाई
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बयान जारी कर कहा कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को आहत करना नहीं था। उन्होंने कहा कि यदि उनकी बात से किसी को चोट पहुंची है तो वे इसके लिए क्षमा चाहते हैं।
शास्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी टिप्पणियां धार्मिक आस्था के खिलाफ नहीं थी, बल्कि वे केवल कथा के संदर्भ में व्याख्या कर रहे थे।

धनबाद अदालत ने शिकायत स्वीकार की और सुनवाई तय की
धनबाद की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (CJM) अदालत ने इस शिकायत को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए 18 दिसंबर 2026 की तारीख निर्धारित की है। यह सुनवाई इस मामले की कानूनी प्रक्रिया की शुरुआत मानी जा रही है।
अदालत में प्रस्तुत साक्ष्यों और याचिका के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। इससे धार्मिक विवादों पर न्यायिक दृष्टिकोण सामने आएगा।
धार्मिक भावनाएं भड़काने के मामले का सामाजिक प्रभाव
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के खिलाफ दर्ज इस मामले से धार्मिक समुदायों में तनाव की संभावना है। इससे आम जनता की धार्मिक आस्था प्रभावित हो सकती है।
ऐसे विवाद धार्मिक सौहार्द्र को कमजोर कर सकते हैं। इसलिए इस मामले की न्यायिक सुनवाई में संतुलित फैसला अपेक्षित है, जो सभी पक्षों की भावनाओं का सम्मान करे।
आगे की कानूनी प्रक्रिया और संभावित परिणाम
18 दिसंबर को सुनवाई के बाद अदालत मामले की गहराई में जाकर सभी साक्ष्यों का विश्लेषण करेगी। इसके आधार पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
इस मामले से अन्य धार्मिक नेताओं के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है कि वे अपने प्रवचनों में सावधानी बरतें ताकि धार्मिक भावनाएं आहत न हों।



