इंदौर में यूपीआइ मर्चेंट फीस के विरोध में व्यापारियों ने एक व्यापक अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 18 सितंबर से शहर के लगभग 10 लाख यूपीआइ स्क्रीन पर विरोध के पोस्टर लगाए जाएंगे। व्यापारियों का कहना है कि यूपीआइ मर्चेंट फीस से आर्थिक दबाव बढ़ेगा और यह व्यापारिक लेन-देन पर नकारात्मक असर डालेगा।
यूपीआइ मर्चेंट फीस के कारण व्यापारियों में चिंता
यूपीआइ से 2000 रुपए से अधिक के मर्चेंट लेन-देन पर 0.4% फीस लागू होने की घोषणा से इंदौर के व्यापारियों में भारी असंतोष है। उनका मानना है कि यह शुल्क व्यापार की लागत बढ़ाएगा और ग्राहकों पर भी इसका असर पड़ेगा। वे इस फैसले को त्योहारों के सीजन के पहले बाजार के लिए चुनौती मानते हैं।
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अक्षय जैन, संयुक्त सचिव अहिल्या चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज, बताते हैं कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए यह शुल्क भारी पड़ सकता है। इससे व्यापार में पारदर्शिता बनाए रखने और डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य पर भी असर पड़ेगा।

व्यापारियों ने सरकार से पुनर्विचार की मांग की
व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार से यूपीआइ मर्चेंट फीस पर पुनर्विचार की अपील की है। योगेश मेहता, अध्यक्ष एआय एमपी, कहते हैं कि यूपीआइ देश की सबसे स्वदेशी और व्यापक डिजिटल भुगतान प्रणाली है। इस पर शुल्क लगाने से इसकी लोकप्रियता कम हो सकती है।
अदित्य कासलीवाल, कार डीलर एसोसिएशन के महामंत्री, भी इस फैसले को व्यापार के लिए दिक्कत बताते हैं। उनका कहना है कि फीस वसूली का भार अंततः ग्राहक को ही उठाना पड़ेगा, जिससे महंगाई बढ़ेगी।
डिजिटल भुगतान पर बढ़ेगा दबाव, नकद लेन-देन बढ़ने की संभावना
मारोठिया बाजार के अध्यक्ष विशाल शमी के अनुसार, डिजिटल भुगतान को प्रोत्साहित करने के बाद मर्चेंट फीस लगाना व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए चिंता का विषय है। इससे नकद लेन-देन में वृद्धि हो सकती है जो अर्थव्यवस्था के लिए नुकसानदायक है।
नमकीन-मिठाई विक्रेता संघ के अनुराग बोथरा ने भी कहा कि यह फैसला व्यापार को जटिल बनाएगा, जबकि पहले से ही व्यापारी कई तरह के टैक्स दे रहे हैं।

इंदौर में विरोध के लिए तैयार हो रहे पोस्टर अभियान
इंदौर रिटेल गारमेंट्स एसोसिएशन ने इस मुद्दे को सरकार तक पहुंचाने के लिए पोस्टर अभियान शुरू किया है। 18 सितंबर से शहर की विभित्र दुकानों पर मर्चेंट फीस के विरोध में पोस्टर लगाए जाएंगे।
यह अभियान राजनीतिक विरोध नहीं बल्कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं की वित्तीय चिंताओं को सरकार तक पहुंचाने का शांतिपूर्ण प्रयास है। पोस्टरों के माध्यम से ग्राहक भी इस मुद्दे से अवगत होंगे।
यूपीआइ मर्चेंट फीस के लागू होने के संभावित आर्थिक प्रभाव
यूपीआइ मर्चेंट फीस से व्यापारियों को मार्जिन कम करने या कीमतें बढ़ाने का विकल्प मिलेगा। इससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है, जो महंगाई को बढ़ावा देगी।
छोटे व्यापारी इस अतिरिक्त शुल्क को वहन नहीं कर पाएंगे, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता प्रभावित होगी। लंबे समय में यह डिजिटल भुगतान के उपयोग को सीमित कर सकता है।



