मिहिर भोज प्रतिमा विवाद से जुड़ा मामला मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में फिर से चर्चा का विषय बना है। हाल ही में इस विवाद में स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई है, जो इस मामले की सुनवाई में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में मिहिर भोज प्रतिमा विवाद की स्टेटस रिपोर्ट पेश
मिहिर भोज प्रतिमा विवाद में उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ में विवाद की जांच के लिए गठित कमेटी ने अपनी रिपोर्ट एक सीलबंद लिफाफे में कोर्ट के समक्ष जमा कर दी है। अभी तक इस रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया है। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान प्रतिमा स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।
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विवाद की पृष्ठभूमि और याचिका
यह विवाद 2021 में शुरू हुआ जब ग्वालियर नगर निगम ने 30 अगस्त को चिरवाई नाका पर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा स्थापित की। प्रतिमा पर ‘गुर्जर’ शब्द लिखे जाने से क्षत्रिय समाज ने आपत्ति जताई। इसके बाद राहुल साहू ने जनहित याचिका दाखिल कर मामले को हाईकोर्ट तक पहुंचाया।
जांच समिति का गठन और उसकी संरचना
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 24 सितंबर 2021 को विवाद सुलझाने के लिए एक जांच समिति गठित की। इस समिति के अध्यक्ष ग्वालियर संभागायुक्त हैं और उपाध्यक्ष ग्वालियर रेंज के आईजी हैं। समिति में दोनों पक्षों के प्रतिनिधि भी शामिल हैं।
सुनवाई में नया मोड़: वंशज का हस्तक्षेप
24 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान अरुणोदय सिंह नामक व्यक्ति ने खुद को सम्राट मिहिर भोज का वंशज बताते हुए कोर्ट में हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि कमेटी ने उनकी बात नहीं सुनी। इससे सुनवाई में नया मोड़ आ गया है।
कोर्ट के आदेश और शांति बनाए रखने की अपील
हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। साथ ही दोनों समुदायों को अपनी लिखित आपत्तियां कोर्ट में प्रस्तुत करने को कहा गया है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने से बचने की सख्त अपील की है।
विधायक पर भड़काऊ भाषण का आरोप और कानूनी चुनौती
हाल ही में ग्वालियर ग्रामीण के विधायक साहब सिंह पर हाईकोर्ट में भड़काऊ भाषण देने का आरोप भी लगा है। अधिवक्ताओं ने कोर्ट से प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया है। यह मामला अभी कोर्ट में विचाराधीन है।



