इंदौर हाईकोर्ट ने रानी सराय में 160 पेड़ हटाने मामले में फैसला सुरक्षित रखा है। इस मामले में केंद्र बिंदु रानी सराय क्षेत्र में प्रस्तावित मेट्रो स्टेशन और ट्रैक के निर्माण के लिए पेड़ों की कटाई है।
मेट्रो परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई विवादित
इंदौर मेट्रो रेल परियोजना के तहत रानी सराय इलाके में मेट्रो स्टेशन और ट्रैक बनाने के लिए लगभग 160 पुराने और परिपक्व पेड़ों को हटाने का प्रस्ताव है। यह पेड़ स्थानीय जैव-विविधता के लिए महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
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पर्यावरणविदों और याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि ये पेड़ हजारों पक्षियों, खासकर हरे तोतों का प्राकृतिक आवास हैं। इनके हटाने से पक्षियों की प्रजाति को नुकसान पहुंच सकता है।

हाईकोर्ट ने पक्षों की दलीलों के बाद फैसला सुरक्षित रखा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने दोनों पक्षों की अंतिम दलीलें सुनने के बाद फैसला सितंबर 2026 तक सुरक्षित रख लिया है। कोर्ट ने पहले भी पेड़ों की कटाई पर अंतरिम रोक लगा रखी है।
जनवरी 2026 में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने पेड़ों की कटाई और ट्रांसप्लांटेशन पर रोक लगाई थी, जिसे जुलाई 2026 में भी बरकरार रखा गया।
पर्यावरण संरक्षण के लिए स्वतंत्र सर्वे की मांग
पर्यावरण संस्था ‘द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी’ ने कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दायर कर स्वतंत्र पक्षी विशेषज्ञ से वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की मांग की है। उनका तर्क है कि सरकारी निरीक्षण दिन भर के लिए सीमित था और पक्षियों के आवास की सही स्थिति नहीं दिखाता।
यह मांग मेट्रो परियोजना के पक्ष और विपक्ष के बीच संतुलन बनाने के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
याचिकाकर्ता ने वन और पर्यावरण कानूनों का हवाला दिया
याचिकाकर्ता के वकील लवकेश सारस्वत ने अदालत में कहा कि बिना ठोस वैज्ञानिक अध्ययन के पेड़ों की कटाई वन (संरक्षण) अधिनियम 1980, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 और वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम 1972 का उल्लंघन है।
उन्होंने जोर दिया कि पुराने और बड़े पेड़ों की जगह नए पौधे लगाना पक्षियों के आवास की तत्काल पूर्ति नहीं कर सकता।
परियोजना प्रबंधन का विकास का तर्क
मेट्रो प्रबंधन का कहना है कि यह परियोजना शहर के विकास के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा है कि वे नियमों के अनुसार नए पेड़ लगाने को तैयार हैं।
वे तर्क देते हैं कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाना जरूरी है और मेट्रो परियोजना से शहर की यातायात व्यवस्था सुधरेगी।
स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं का विरोध
इस मुद्दे पर स्थानीय पर्यावरण कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने जनवरी 2026 में कई दिनों तक सत्याग्रह और शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन किए। उनका कहना है कि रानी सराय के पेड़ इंदौर के फेफड़े हैं और इन्हें बचाना चाहिए।
उन्होंने मेट्रो स्टेशन स्थानांतरण की मांग की है ताकि पेड़ों और पक्षियों का संरक्षण हो सके।



