इंदौर नगर निगम के राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी की घटना ने प्रशासन की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वार्ड 69, जोन क्रमांक 2 के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में हुई इस गड़बड़ी में ₹2.46 करोड़ की रसीदें दर्ज होने के बावजूद बैंक खातों में मात्र ₹16.70 लाख ही जमा पाए गए। यह वित्तीय विसंगति इंदौर नगर निगम के राजस्व रिकॉर्ड में बड़े पैमाने पर अनियमितता का संकेत देती है।
राजस्व रिकॉर्ड में मिली ₹2.30 करोड़ की गड़बड़ी
जोन 2 के वार्ड 69 में पानी, कचरा और संपत्ति कर वसूली के दौरान बड़ी वित्तीय गड़बड़ी सामने आई है। विभागीय पोर्टल पर कुल ₹2,46,29,999 की वसूली दिखायी गई थी, लेकिन बैंक खातों में जमा राशि सिर्फ ₹16,70,252 ही मिली। इस अंतर ने ₹2,29,59,747 का बड़ा वित्तीय घोटाला उजागर किया।
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जांच में पता चला कि कुछ फर्जी खातों के जरिए पीओएस मशीनों से नकली रसीदें जारी की गईं, जिनके बदले वास्तविक भुगतान बैंक में जमा नहीं हुए। इससे निगम के राजस्व रिकॉर्ड में भारी धोखाधड़ी हुई।

फर्जी रसीदें काटने का तरीका और मकसद
इस वित्तीय गड़बड़ी की जड़ में पीओएस मशीन के माध्यम से फर्जी रसीदें काटना था। राजस्व वसूली को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने के लिए कर्मचारियों ने नकली खातों का सहारा लिया।
यह कदम वसूली ग्राफ को बेहतर दिखाने के लिए उठाया गया, जिससे निगम के अधिकारी और विभागीय रिकॉर्ड प्रभावित हुए। इस तरह की गड़बड़ी से आम जनता का भरोसा भी टूटता है और कर वसूली के पारदर्शी माहौल पर असर पड़ता है।
निलंबित कर्मचारी और उनके कर्तव्य
नगर निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल ने इस गंभीर मामले में तुरंत कार्रवाई करते हुए बिल कलेक्टर संयम नीमा और प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी अखिलेश मालवीय को निलंबित कर दिया।
दोनों कर्मचारियों का मुख्यालय ट्रेंचिंग ग्राउंड बनाया गया है। निलंबन के दौरान इनकी जवाबदेही और भूमिका की गहन जांच की जाएगी।
प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी पर अतिरिक्त आरोप
निलंबन आदेश में प्रभारी सहायक राजस्व अधिकारी अखिलेश मालवीय पर तीन संपत्ति खातों में अनियमितता के आरोप भी शामिल हैं।
- प्रॉपर्टी आईडी 1000876273 में बिना पंजीकृत दस्तावेज और स्वीकृति के नामांतरण।
- प्रॉपर्टी आईडी 9000273809 में पुराने खाते को अलग किए बिना नया खाता बनाना।
- प्रॉपर्टी आईडी 1000858066 में संपत्ति कर निर्धारण नियमों के विपरीत।
इन अनियमितताओं से निगम को वित्तीय नुकसान हुआ है और यह राजस्व रिकॉर्ड की विश्वसनीयता को और कमजोर करता है।
आम जनता पर राजस्व रिकॉर्ड की गड़बड़ी का असर
राजस्व रिकॉर्ड में ऐसी गड़बड़ी से करदाताओं का भरोसा कमजोर होता है। करों का सही उपयोग न होने से नगर विकास और सेवाओं पर असर पड़ता है।
इसके अलावा, पारदर्शिता की कमी से कर वसूली में गिरावट आ सकती है, जो शहर की आर्थिक स्थिरता के लिए चिंताजनक है।
आगे की संभावित कार्रवाई और प्रशासन की भूमिका
नगर निगम ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच जारी रखी है। दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत भी दिए गए हैं।
इसके साथ ही राजस्व वसूली के सिस्टम में सुधार और निगरानी बढ़ाने के लिए कदम उठाए जाएंगे ताकि भविष्य में इस तरह की गड़बड़ी न हो।



