भोपाल में सफाईकर्मियों की हड़ताल ने राजधानी की स्वच्छता व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। सफाईकर्मी नियमितीकरण, न्यूनतम वेतन वृद्धि और ठेका प्रथा खत्म करने की मांग लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। इस आंदोलन पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि यह मुद्दा हित में विचाराधीन है।
सफाईकर्मियों की हड़ताल की शुरुआत और मांगें
4 नवंबर 2026 से अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के आह्वान पर भोपाल समेत प्रदेश के कई नगर निगमों के सफाईकर्मियों ने काम बंद कर दिया है। उनका मुख्य उद्देश्य संविदा प्रथा समाप्त कर उन्हें पक्की नौकरी दिलाना और न्यूनतम वेतन 25,000 रुपए करने की मांग है। साथ ही, वे अनुकंपा नियुक्ति की भी मांग कर रहे हैं।
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प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट के अनुसार करीब 2.5 लाख सफाईकर्मी इस आंदोलन में शामिल हैं, जिनमें भोपाल के लगभग 7,000 कर्मचारी भी हैं। हड़ताल से नगर निगम के कुल 13,000 कर्मचारी प्रभावित हुए हैं।
भोपाल में कचरा प्रबंधन पर हड़ताल का प्रभाव
भोपाल में रोजाना लगभग 850 टन कचरा उत्पन्न होता है, जो हड़ताल के कारण उठाना बंद हो गया है। शहर के कई हिस्सों में कचरे के ढेर लग गए हैं और 400 से अधिक कचरा गाड़ियां खड़ी हैं। इससे सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट उत्पन्न होने का खतरा बढ़ गया है।
दीपावली जैसे त्योहार के बाद यह समस्या और गंभीर हो गई है क्योंकि त्योहार के दौरान कचरे की मात्रा बढ़ जाती है। नगर निगम ने कुछ आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात किया है, लेकिन वे पर्याप्त नहीं हैं।
नगर निगम के अन्य विभागों का समर्थन और पानी सप्लाई पर खतरा
सफाईकर्मियों की हड़ताल को अब नगर निगम के अन्य विभागों का भी समर्थन मिल रहा है। जलापूर्ति विभाग के कर्मचारियों ने पानी सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी है। इससे शहर में पानी संकट गहरा सकता है।
स्वच्छता निरीक्षण कर्मचारी और स्वास्थ्य अधिकारी भी आंदोलन में शामिल हो गए हैं। इससे नगर निगम के कामकाज पर व्यापक प्रभाव पड़ा है।
शासन और मुख्यमंत्री का रुख
पूर्व में मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कर्मचारियों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब यूनियन सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से वार्ता की मांग कर रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि यह मामला हित में विचाराधीन है और जल्द ही समाधान निकाले जाने की संभावना है। प्रशासन ने नियमितीकरण को कैबिनेट स्तर का विषय बताया है, जिसके लिए वित्त और सामान्य प्रशासन विभाग से मंजूरी लेनी होगी।
हड़ताल के कारण आम जनता को हो रही समस्याएं
सफाईकर्मियों की हड़ताल से शहर में गंदगी फैल गई है। कचरे के ढेरों के कारण कीटाणु फैलने का खतरा बढ़ गया है। कई इलाके गंदगी से जूझ रहे हैं और लोगों को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
इसके अलावा, पानी सप्लाई बंद होने की स्थिति में जनता को पीने और घरेलू कामों के लिए पानी की कमी का सामना करना पड़ेगा। इससे खासकर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवार प्रभावित होंगे।
आगे की संभावनाएं और आंदोलन का असर
यूनियन के नेताओं ने हड़ताल जारी रखने का फैसला किया है। वे मुख्यमंत्री से सीधे मिलने की तैयारी में हैं। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और व्यापक हो सकता है।
शहर में कचरा प्रबंधन और जलापूर्ति जैसी बुनियादी सेवाओं पर लंबी अवधि के लिए असर पड़ने की आशंका है। प्रशासन और यूनियन के बीच सकारात्मक वार्ता से ही स्थिति सामान्य हो सकेगी।



