मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने ट्विशा शर्मा केस में पूर्व जज गिरिबाला सिंह की जमानत याचिका खारिज कर दी है। यह फैसला 4 नवंबर 2026 को जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की एकल पीठ ने सुनाया। जमानत खारिज करने के पीछे मुख्य कारण जांच में महत्वपूर्ण फॉरेंसिक रिपोर्टों का अभी भी लंबित होना है, जिससे मामले की गंभीरता स्पष्ट होती है।
ट्विशा शर्मा केस में जमानत याचिका खारिज होने के कारण
हाईकोर्ट ने अपने 23 पन्नों के विस्तृत आदेश में बताया कि मृतिका ट्विशा शर्मा के आईफोन से एक्सट्रैक्ट किए गए प्राइमरी डेटा की रिपोर्ट अभी आनी बाकी है। साथ ही, आरोपी गिरिबाला सिंह के घर की CCTV फुटेज की निरंतरता और प्रामाणिकता की जांच के लिए CFSL, नई दिल्ली से रिपोर्ट भी लंबित है।
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इसके अलावा, जांच एजेंसियां घटना के तुरंत बाद गिरिबाला सिंह द्वारा प्रभावशाली व्यक्तियों से किए गए कथित संपर्कों और उनके चैट संदेशों की भी गहन समीक्षा कर रही हैं। इन सब कारणों से अभी जमानत देना न्यायोचित नहीं माना गया।

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का विस्तृत आदेश और सुनवाई
26 अक्टूबर 2026 को हुई मैराथन बहस के बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा था। आदेश में कोर्ट ने कहा कि आरोपों की गंभीरता, जांच के दौरान जुटाए गए सबूत, सीसीटीवी फुटेज, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और मृतका की मौत से पहले की परिस्थितियों को ध्यान में रखा गया है।
न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जांच पूरी होने और सभी फॉरेंसिक रिपोर्ट आने तक जमानत पर रिहाई उचित नहीं होगी। इस आदेश ने आरोपी गिरिबाला सिंह को एक बार फिर से बड़ा झटका दिया है।
ट्विशा शर्मा की मौत की पृष्ठभूमि और आरोप
पूर्व मॉडल ट्विशा शर्मा ने 12 मई 2026 को भोपाल के कटारा हिल्स स्थित आवास पर फांसी लगाकर कथित आत्महत्या की थी। पुलिस और बाद में CBI ने दहेज प्रताड़ना और दहेज मृत्यु के तहत गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह के खिलाफ मामला दर्ज किया।
मामले की जांच अभी जारी है और आरोपों में घरेलू हिंसा, मानसिक प्रताड़ना, और गर्भावस्था को लेकर विवाद शामिल हैं। मृतका के परिवार ने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
जेल में गिरिबाला सिंह की वर्तमान स्थिति
गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह 2 जून 2026 से न्यायिक हिरासत में जेल में बंद हैं। भोपाल की ट्रायल कोर्ट ने पहले अग्रिम जमानत दी थी, जिसे हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। तब से दोनों आरोपी जेल में ही हैं।
हाईकोर्ट के हालिया फैसले के बाद गिरिबाला सिंह की जमानत की उम्मीदें लगभग खत्म हो गई हैं, जिससे उनकी दिवाली जेल में ही गुजरेगी।
फॉरेंसिक जांच की अहमियत और आगे की कार्रवाई
मामले में फॉरेंसिक जांच की भूमिका अहम है। मृतका के मोबाइल फोन और घर के CCTV के DVR की फॉरेंसिक रिपोर्टों के बिना जांच अधूरी मानी जा रही है। सीबीआई भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 193(9) के तहत जांच कर रही है।
जांच पूरी होने पर ही आरोपों की पुष्टि या खंडन संभव होगा। कोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि जांच में मिले नए तथ्य भविष्य में मुकदमे की दिशा तय करेंगे।



