दिवाली पर चतुग्रही योग का दुर्लभ संयोग ज्योतिषीय गणनाओं में एक महत्वपूर्ण स्थिति माना जाता है। इस दिन तुला राशि में सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा के एक साथ संचरण से यह विशेष योग बनता है, जो मां लक्ष्मी की विशेष कृपा का सूचक है।
चतुग्रही योग क्या है और इसका ज्योतिषीय महत्व
चतुग्रही योग तब बनता है जब चार ग्रह तुला राशि में एक साथ युति करते हैं। इनमें सूर्य, बुध, मंगल और चंद्रमा शामिल हैं। इस संयोजन के कारण बुधादित्य योग और लक्ष्मी-नारायण योग भी बनते हैं, जो आर्थिक समृद्धि का संकेत देते हैं। स्वाति नक्षत्र तथा आयुष्मान योग का संयोग इस दिन के महत्व को और बढ़ाता है।
👉 यह भी पढ़ें:

मां लक्ष्मी की कृपा से जुड़े धार्मिक विश्वास
सनातन धर्म में दिवाली का त्योहार मां लक्ष्मी की पूजा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि चतुग्रही योग के दौरान मां लक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर की पूजा करने से व्यापार, नौकरी और आर्थिक स्थिति में लाभ होता है। इस योग में धन की प्राप्ति और समृद्धि की विशेष संभावना रहती है।
2021 की दिवाली में चतुग्रही योग का उदाहरण
इससे पहले 4 नवंबर 2021 को दिवाली के दिन तुला राशि में चार ग्रहों के संयोग से चतुग्रही योग बना था। इस घटना को मीडिया ने व्यापक रूप से कवर किया था। उस वर्ष इस योग के प्रभाव से कई राशियों में आर्थिक और व्यावसायिक उन्नति के संकेत देखे गए थे।
2025 और 2026 की दिवाली में ग्रहों की स्थिति में अंतर
साल 2025 की दिवाली में तीन ग्रहों की युति से त्रिग्रही योग बना था, जो चतुग्रही योग से अलग है। वहीं, 2026 की दिवाली पर शुक्रादित्य और बुधादित्य योग का विशेष संयोग होगा। इस बार मेष, तुला, धनु और मीन राशि वालों को करियर और आर्थिक मामलों में लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
भाग्यशाली राशियों पर ज्योतिषीय योग का प्रभाव
ज्योतिष के अनुसार, चतुग्रही योग और इससे जुड़े अन्य योग मेष, तुला, धनु, मीन और कन्या राशियों के लिए शुभ माने जाते हैं। इस दौरान इन राशियों के जातकों को नए अवसर, नौकरी में उन्नति और व्यापार में लाभ की संभावनाएं मिलती हैं।
आम लोगों के जीवन में चतुग्रही योग का प्रभाव
दिवाली पर चतुग्रही योग का संयोग न केवल धार्मिक बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। इससे आम लोगों को अपने आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद मिलती है। इसके अलावा, परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और सामाजिक प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है।



