सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा SIR प्रक्रिया पर जवाब, फॉर्म-6 की बाध्यता को कम करने को कहा

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सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया पर चुनाव आयोग से जवाब मांगा है और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर विशेष जोर दिया है। इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने की। कोर्ट ने चुनाव आयोग से सवाल किए कि क्या SIR प्रक्रिया के तहत गणना फॉर्म न जमा करने वाले मतदाताओं को हमेशा के लिए वोटर अधिकारों से वंचित किया जा सकता है।

SIR प्रक्रिया पर सुप्रीम कोर्ट ने उठाए संवेदनशील सवाल

सुप्रीम कोर्ट ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग से कड़ी प्रतिक्रिया मांगी है। कोर्ट ने पूछा कि क्या इस प्रक्रिया में वोटर अधिकारों का हनन हो रहा है। विशेषकर उन मतदाताओं के लिए जो गणना फॉर्म जमा नहीं कर पाए। कोर्ट ने आयोग को कहा कि मतदाता सूची से हटाए गए या छूटे हुए नागरिकों को फिर से नाम जोड़ने के लिए फॉर्म-6 भरने की बाध्यता को कम किया जाना चाहिए क्योंकि यह गैरजरूरी बोझ डालता है।

सुनवाई के दौरान न्यायालय ने मतदाताओं को आश्वासन दिया कि कोई भी मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित नहीं होगा। कोर्ट ने कहा कि जब तक मामला विचाराधीन है, तब तक मतदाताओं को अपने अधिकारों के हनन से डरने की जरूरत नहीं है।

विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

चुनाव आयोग ने SIR प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण जारी किया

चुनाव आयोग ने 3 नवंबर 2026 को एक अधिसूचना जारी कर स्पष्ट किया कि जो मतदाता ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं, वे बिना किसी कानूनी कार्रवाई के डर के फॉर्म-6 भर सकते हैं। यह कदम मतदाताओं को उनकी सूची में पुनः नामांकन का अधिकार सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।

इसके अलावा, आयोग ने SIR के तहत दावों और आपत्तियों की समय सीमा को 25 नवंबर 2026 तक बढ़ा दिया है, ताकि अधिक से अधिक मतदाता अपनी स्थिति सुधार सकें। यह फैसला कोर्ट के सवालों के बाद आया है, जिससे आयोग ने मतदाताओं के हित में कार्रवाई करने का भरोसा दिया।

फॉर्म-6 भरने की बाध्यता और मतदाता अधिकार

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूछा कि जो मतदाता पहले से ही वोटर सूची में हैं, उन्हें फिर से फॉर्म-6 क्यों भरना पड़ता है। कोर्ट ने इस प्रक्रिया को मतदाताओं के लिए अतिरिक्त बोझ माना और कहा कि इससे मतदाताओं के अधिकारों को अनावश्यक रूप से प्रभावित किया जा सकता है।

कोर्ट ने आयोग से निर्देश दिए कि हटाए गए मतदाताओं की सूचियां स्थानीय भाषाओं में ब्लॉक स्तर पर लगाई जाएं ताकि लोग अपने नाम की स्थिति आसानी से जान सकें और बिना किसी डर के अपनी शिकायत दर्ज करा सकें।

विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया और मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर भी सवाल उठाए

मई 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला दिया था कि लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 16 के तहत SIR प्रक्रिया करना चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार है। हालांकि, अब कोर्ट ने इस प्रक्रिया के कार्यान्वयन में मतदाता अधिकारों की रक्षा को लेकर चिंताएं जताईं हैं।

साथ ही, मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य आयुक्तों को कानूनी संरक्षण देने वाले अधिनियम 2023 की धारा 16 को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि इससे चुनाव आयोग के अधिकारियों को व्यापक छूट मिलती है, जो मतदाताओं के लिए न्यायसंगत नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को तय की

कोर्ट ने इस मामले में तत्काल रोक या आदेश जारी करने से इनकार करते हुए अगली विस्तृत सुनवाई की तारीख 19 नवंबर 2026 निर्धारित की है। इस बीच, कोर्ट ने मतदाताओं को भरोसा दिया कि उनके वोटर अधिकार सुरक्षित रहेंगे और वे घबराएं नहीं।

चुनाव आयोग ने भी कोर्ट को भरोसा दिया है कि वह SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाताओं के हितों का ध्यान रखेगा और प्रक्रियाओं में सुधार के लिए कदम उठाएगा।

मतदाता अधिकारों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि मतदाता अधिकार लोकतंत्र का मूल आधार हैं। इसलिए, किसी भी प्रक्रिया या नियम के कारण वोटर अधिकारों का हनन नहीं होना चाहिए। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिए हैं कि मतदाता सूची को दुरुस्त करते समय पारदर्शिता, न्याय और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए।

इस मामले में कोर्ट का रुख यह दर्शाता है कि मतदाता अधिकारों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और चुनाव आयोग को भी इसी के अनुरूप अपनी नीतियां बनानी होंगी।

Ardhendu Bhushan - Consulting Editor
Ardhendu Bhushan - Consulting Editorhttp://www.hbtvnews.com
Ardhendhu Bhushan is a senior consulting editor with extensive experience in the media industry. He is recognized for his sharp editorial insight and strategic guidance.

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