इंदौर। कृष्णा गृह निर्माण संस्था के जमीन आवंटन मामले में इंदौर विकास प्राधिकरण (आई़डीए) पूरी तरह उलझ गया है। इंदौर लोकायुक्त में हुई शिकायत के बाद आईडीए से जवाब-तलब किया गया था। अब लोकायुक्त ने पूर्व और वर्तमान सीईओ को नोटिस भेज दिया है।
इस मामले में लोकायुक्त में हुई शिकायत में कहा गया था कि एक संस्था को पहले ही अनुबंधित जमीन का आवंटन किए जाने के बावजूद ईश्वर नगर की जमीन के बदले योजना क्रमांक 113 और 136 में अतिरिक्त भूखंड आवंटित करने की प्रक्रिया की गई। शिकायत के बाद लोकायुक्त ने 9 सितंबर 26 को आईडीए को पत्र भेजकर बिन्दुवार जानकारी मांगी थी। इसके बाद अब कार्रवाई की स्वीकृति के लिए फाइल भोपाल भेज दी गई है।
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संभागायुक्त ने भी खींच लिए थे हाथ
बताया जाता है कि मामला सामने आने के बाद संभागायुक्त और आईडीए अध्यक्ष भास्कर लक्षकार ने भी फाइल तलब की थी। उन्होंने कृष्णा गृह निर्माण संस्था के जमीन आवंटन से जुड़े सारे दस्तावेज आईडीए को भेजने के लिए कहा था। उम्मीद की जा रही थी कि संभागायुक्त इस मामले की निष्पक्ष जांच करेंगे, लेकिन उन्होंने भी हाथ खींच लिए।
एक मंत्री के खास व्यक्ति का आ रहा नाम
सूत्र बताते हैं कि इस मामले में एक मंत्री के खास व्यक्ति का नाम सामने आ रहा है। इसी वजह से आईडीए के वर्तमान और पूर्व सीईओ ने भी गलत तरीके से जमीन आवंटन नहीं रोका। अब शायद संभागायुक्त भी उसी राजनीतिक दबाव में चुप बैठे हैं।
ऊपर से भी की गई थी तहकीकात
सूत्र बताते हैं कि इस पूरे मामले में आईडीए सीईओ डॉ.परीक्षित झाड़े ने ऊपर से प्रेशर होने की बात कही थी। इसके बाद ऊपर से भी इस मामले में तहकीकात की गई है। बताया जाता है कि ऊपर से भी यह स्पष्ट करा दिया गया था कि इस मामले में किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं था। इससे साफ जाहिर है कि सीईओ नकली दबाव बना रहे थे।
शिकायत में 40 करोड़ के नुकसान का आरोप
कृष्णा गृह निर्माण सहकारी संस्था को अनुबंधित भूमि के अतिरिक्त करीब 4,047 वर्गमीटर भूमि के भूखंड आवंटित किए जाने को लेकर प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। मामले में प्राधिकरण के संकल्प क्रमांक-9 के प्रभारी, भू-अर्जन शाखा तथा संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है। शिकायतकर्ता ने दावा किया है कि इस पूरे प्रकरण में प्राधिकरण को करीब 40 करोड़ रुपये के संभावित आर्थिक नुकसान और संस्था को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास हुआ।
ईश्वर नगर की भूमि पर पहले हो चुका था समझौता
ईश्वर नगर की 2 एकड़ भूमि योजना क्रमांक 113 में शामिल रखे जाने और शेष भूमि को अनुबंध के अनुसार संस्था को विकसित कर देने पर सहमति बनी थी। शिकायत में यह भी कहा गया है कि संस्था ने न्यायालय में लंबित विविध याचिका क्रमांक 1172/89 वापस लेकर प्राधिकरण के पक्ष में समझौता किया था। समझौते में कथित तौर पर यह शर्त थी कि संस्था अथवा उसका कोई सदस्य भविष्य में ईश्वर नगर की 2 एकड़ भूमि के बदले भूखंड की मांग नहीं करेगा। इसी प्रकार 12 अक्टूबर 2000 के इकरारनामे का हवाला देते हुए शिकायतकर्ता ने कहा है कि ईश्वर नगर की भूमि के बदले भविष्य में भूखंड की मांग नहीं करने की शर्त संस्था के साथ तय की गई थी।
स्कीम 114 में जमीन, 136 में आवंटन
सूत्र बताते हैं कि नियमों के जानकार झाड़े साहब ने एक और चमत्कार किया। कृष्णा गृह निर्माण संस्था की जमीन स्कीम 113 में थी, जबकि झाड़े साहब ने जमीन स्कीम 136 में दे दी। वह भी प्रीमियम प्लॉट। एक तो शपत्र होने के बाद भी जमीन आवंटित करना नियम विरुद्ध है। इसके बाद और नियम तोड़ते हुए दूसरी स्कीम में जमीन आवंटित कर दी गई।



