कान्हा टाइगर रिजर्व में पिछले 7 महीनों में 11 बाघों की मौत हुई है, जिसमें से अधिकतर की वजह कुत्तों से फैला जानलेवा वायरस, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) पाया गया है। यह गंभीर मामला जंगल और आसपास के इलाकों में वन्यजीव संरक्षण के लिए चुनौती बन गया है।
कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत का विस्तृत विवरण
अप्रैल 2026 से अक्टूबर 2026 के दौरान कान्हा टाइगर रिजर्व में कुल 11 बाघों की मौत दर्ज की गई। इनमें से आठ बाघों की मौत का कारण कैनाइन डिस्टेंपर वायरस का संक्रमण पाया गया। खासकर अप्रैल में सार्ही रेंज में बाघिन T-141 और उसके चार शावकों की एक साथ मौत इस वायरस के कारण हुई थी।
👉 यह भी पढ़ें:
- इंदौर के राजबाड़ा में दिवाली बाजार हुआ गुलजार, छोटे व्यापारियों को उम्मीद
- देवास जहरीली शराब कांड में कांग्रेस नेता आनंद कासलीवाल इंदौर से गिरफ्तार
- मध्यप्रदेश में नवंबर में कड़ाके की ठंड, अंतिम सप्ताह में पारा 10 डिग्री तक गिरेगा
- मुरैना में 19 महीने के चीते KNG-22 की हत्या के मुख्य आरोपी भगवाना सिंह मोगिया गिरफ्तार
- स्वास्थ्य विभाग का अटैचमेंट खेल: उज्जैन संभाग 626 के साथ नंबर 1
- नर्मदापुरम के पचमढ़ी में बायसन के हमले में उत्तराखंड के आर्मी जवान की मौत

वायरस फैलने का कारण और प्रभाव
कैनाइन डिस्टेंपर वायरस मुख्यतः जंगल के आसपास के आवारा और घरेलू कुत्तों से फैलता है। यह वायरस बाघों के श्वसन, पाचन और तंत्रिका तंत्र पर हमला करता है, जिससे उनकी मृत्यु हो जाती है। इससे बाघों का स्वाभाव भी बदल सकता है, वे आक्रामक हो सकते हैं या शिकार करने में असमर्थ हो जाते हैं।
राज्य सरकार और उच्च न्यायालय की प्रतिक्रिया
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सितंबर व अक्टूबर में हुई बाघ मौतों की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है। राज्य सरकार को 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का आदेश दिया गया है। अगली सुनवाई 16 नवंबर 2026 को निर्धारित है।

जनहित याचिका में उठाए गए सवाल
अधिवक्ता सुब्रत चक्रवर्ती द्वारा दायर जनहित याचिका में दावा किया गया है कि कान्हा में अब तक करीब 20 बाघ संदिग्ध परिस्थितियों में मरे हैं। इस याचिका में वायरस के कारणों और संक्रमण के प्रसार को रोकने के उपायों पर भी सवाल उठाए गए हैं।
वन विभाग का बचाव और टीकाकरण अभियान
वन विभाग ने इस संक्रमण को रोकने के लिए रिजर्व के आसपास 167 से अधिक गांवों में 2,700 से अधिक आवारा कुत्तों का टीकाकरण किया है। साथ ही साझा जलस्रोतों की सफाई कर संक्रमण के प्रसार को कम करने का प्रयास किया जा रहा है।
कान्हा टाइगर रिजर्व की सुरक्षा के लिए आगे की चुनौतियां
इस घटना से यह स्पष्ट होता है कि कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की सुरक्षा के लिए वन्यजीव संरक्षण नीतियों में सुधार आवश्यक है। आवारा कुत्तों पर नियंत्रण और वायरस की रोकथाम के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं, ताकि बाघों की संख्या सुरक्षित रह सके।



