4 हजार में बेचा बैंक खाता मामला सामने आया है, जिसमें इंदौर क्राइम ब्रांच ने साइबर ठगी में इस्तेमाल हो रहे म्यूल बैंक खाते का खुलासा किया है। इस पूरे नेटवर्क में पांच राज्यों से साइबर ठगी की शिकायतें दर्ज हैं।
इंदौर क्राइम ब्रांच ने किया बैंक खाते का खुलासा
इंदौर क्राइम ब्रांच ने ऑपरेशन मैट्रिक्स-2 के तहत आनंद चौरसिया और विशाल शेखावत के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। आनंद चौरसिया ने महज 4,000 रुपये के लालच में अपना बैंक ऑफ महाराष्ट्र का खाता, रजिस्टर्ड सिम और बैंकिंग किट विशाल को सौंप दी। इस खाते का इस्तेमाल पांच राज्यों में साइबर ठगी के लिए किया गया।
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पांच राज्यों में दर्ज हुई शिकायतें
जांच में सामने आया कि इस बैंक खाते के जरिए तमिलनाडु, दिल्ली, गुजरात, महाराष्ट्र और तेलंगाना में ठगी की रकम ट्रांसफर की गई। संबंधित थाने हैं मदुरै सिटी के के.पुदुर थाना, साउथ डिस्ट्रिक्ट साइबर पुलिस स्टेशन दिल्ली, सुरेंद्रनगर का वाधवान थाना गुजरात, मुंबई का नेहरू नगर थाना और हैदराबाद का बोराबांडा थाना।
आनंद चौरसिया को गिरफ्तार किया गया
इंदौर क्राइम ब्रांच ने आनद चौरसिया को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच में पता चला कि विशाल शेखावत ने ही सिम उपलब्ध कराकर खाता खुलवाया था और खाते का पूरा संचालन भी कर रहा था। आनंद ने बताया कि विशाल के कहने पर उसने खाता खुलवाया था।

साइबर ठगी के लिए म्यूल बैंक खाते का इस्तेमाल
विशाल शेखावत द्वारा संचालित इस खाते का इस्तेमाल साइबर ठगों द्वारा ठगी की रकम जमा करने और ट्रांसफर करने के लिए किया गया। इस तरह के म्यूल बैंक खाते धोखाधड़ी के लिए एक अहम जरिया बन गए हैं जो अपराधियों को छुपने में मदद करते हैं।
साइबर ठगी से आम लोगों को खतरा
ऐसे मामलों से स्पष्ट होता है कि आम लोगों के बैंक खाते साइबर ठगों द्वारा आसानी से खरीद लिए जाते हैं। इससे न केवल खाताधारक को जोखिम होता है, बल्कि पूरे वित्तीय तंत्र की सुरक्षा पर भी सवाल उठते हैं। यह घटना आम आदमी के लिए चेतावनी है कि वे अपने बैंक खातों को अवैध गतिविधियों के लिए न बेचें।
आगे की जांच और संभावित कार्रवाई
इंदौर पुलिस ने बड़े पैमाने पर जांच शुरू कर दी है ताकि इस साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके। अन्य संदिग्ध खातों की भी पहचान की जा रही है। जांच के बाद आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की संभावना है।



