सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट एक महीने में सौंपने का निर्देश दिया है। यह आदेश 5 नवंबर 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने जारी किया। अदालत ने हाई-पावर्ड इंक्वायरी कमेटी (HPEC) को इस जांच में प्राथमिकता वाले मुद्दों पर अपनी पहली फैक्ट-फाइंडिंग रिपोर्ट 1 माह के भीतर प्रस्तुत करने को कहा है।
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट में एक महीने की समयसीमा
सुप्रीम कोर्ट ने जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने कहा कि वह जांच के नतीजों के लिए अनिश्चितकाल तक इंतजार नहीं कर सकती। इसलिए, जांच समिति को 2 दिसंबर 2026 तक अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। यह रिपोर्ट प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई हिंसा और अत्यधिक बल प्रयोग के मामलों पर केंद्रित होगी।
👉 यह भी पढ़ें:
- सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की याचिका खारिज की, केस हाई कोर्ट भेजा
- सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से मांगा SIR प्रक्रिया पर जवाब, फॉर्म-6 की बाध्यता को कम करने को कहा
- बीना विधायक निर्मला सप्रे का दलबदल मामला : सुप्रीम कोर्ट ने विधानसभा अध्यक्ष को 2 महीने में फैसले के दिए निर्देश
- शहडोल में तेंदुए ने 15 वर्षीय किशोरी को उठाया, 300 मीटर दूर मिला शव
- दिल्ली-NCR में 7 और 8 नवंबर को ग्रीन पटाखे जलाने की सुप्रीम कोर्ट से छूट
- देवास में अवैध शराब तस्करों ने ट्रक से रौंदा, टीआई दिलीप पुरी की मौत
जांच समिति जल्द से जल्द मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए आवश्यक सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। इससे अदालत को मामले में उचित कदम उठाने में मदद मिलेगी।

जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त 2026 को पांच सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। इसकी अध्यक्षता पूर्व न्यायाधीश जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी कर रहे हैं। समिति के अन्य सदस्य हैं पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, पूर्व न्यायाधीश शलिंदर कौर, पूर्व CBI निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला, और मेघालय के सेवानिवृत्त DGP डॉ. एल.आर. बिश्नोई।
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने डॉ. बिश्नोई का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। समिति को पुलिस के पेलेट गन के उपयोग, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न और हिंसा के आरोपों की प्राथमिकता से जांच करनी है।
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट में कम शिकायतें मिलने की चिंता
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि प्रभावितों से अब तक बहुत कम शिकायतें प्राप्त हुई हैं। समिति ने 149 समाचार पत्रों में नोटिस प्रकाशित किए और ऑनलाइन पोर्टल भी लॉन्च किया। इसके बावजूद शिकायतों की संख्या अपेक्षित स्तर से काफी कम रही।
सुप्रीम कोर्ट ने इस कमी पर चिंता व्यक्त की है और निर्देश दिया कि सभी याचिकाओं, शिकायतों और वीडियो साक्ष्यों को जांच समिति को सौंपा जाए ताकि जांच में बाधा न आए। इससे जांच की गति बढ़ेगी और निष्पक्षता सुनिश्चित होगी।

जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट के लिए उपलब्ध कराए जाएंगे वीडियो और दस्तावेज
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट के लिए याचिकाकर्ताओं और पीड़ितों द्वारा प्रस्तुत सभी वीडियो फुटेज, हलफनामे और अन्य दस्तावेज जांच समिति को सीधे उपलब्ध कराए जाएंगे। इससे जांच में वास्तविक घटनाक्रम का बेहतर आकलन होगा।
इस निर्देश का उद्देश्य जांच को प्रभावी और पारदर्शी बनाना है ताकि सभी पक्षों के दावे और शिकायतें सही तरीके से जांचे जा सकें।
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट का संदर्भ और पृष्ठभूमि
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट की पृष्ठभूमि जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन से जुड़ी है। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी। प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और अन्य मांगें की थीं।
प्रदर्शन के बाद पुलिस की कथित अत्यधिक बल प्रयोग और हिंसा को लेकर सवाल उठे थे। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति गठित की थी। अब अदालत की निर्देशानुसार जांच समिति को जल्द से जल्द रिपोर्ट सौंपनी होगी।
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट के बाद संभावित परिणाम
जंतर मंतर प्रदर्शन जांच रिपोर्ट मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट मामले की अगली सुनवाई में जांच के निष्कर्षों को देखेगा। इसके आधार पर कोर्ट पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों पर निर्णय ले सकती है।
अगली सुनवाई 2 दिसंबर 2026 को निर्धारित है। इससे आम जनता को भी उम्मीद है कि मामले में निष्पक्षता और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। यह जांच लोकतंत्र और कानून के शासन के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।



