केन्द्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित हो गए हैं। 5 नवंबर 2026 को नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख के बाद रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने उनके निर्विरोध निर्वाचित होने की घोषणा की।
मध्यप्रदेश से रिक्त हुई राज्यसभा सीट और उपचुनाव
यह राज्यसभा सीट केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन के 14 अक्टूबर 2026 को इस्तीफा देने के कारण खाली हुई थी। भाजपा ने उपचुनाव के लिए केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को उम्मीदवार बनाया। उनका नामांकन 31 अक्टूबर को भोपाल स्थित मध्यप्रदेश विधानसभा में दाखिल किया गया था।
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निर्वाचन प्रक्रिया और नामांकन पत्रों की जांच
निर्वाचन अधिकारी ने 3 नवंबर को हरदीप सिंह पुरी का नामांकन वैध माना। उनके मुकाबले कांग्रेस समर्थित राजकुमार लोहानी और निर्दलीय कांते सयन्ना ने भी नामांकन दाखिल किए थे। हालांकि, दोनों के नामांकन फॉर्म नियमों के अनुरूप नहीं पाए गए और खारिज कर दिए गए।
निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद प्रमाण पत्र की प्राप्ति
हरदीप सिंह पुरी की दिल्ली में व्यस्तता के कारण भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने रिटर्निंग अधिकारी से उनका निर्वाचन प्रमाण पत्र प्राप्त किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा और अन्य भाजपा नेता भी मौजूद रहे।

विपक्ष की आपत्तियों और कानूनी चुनौती
कांग्रेस नेताओं ने नामांकन के परीक्षण के दौरान कई आपत्तियां उठाईं, लेकिन रिटर्निंग अधिकारी ने सभी खारिज कर दीं। इसके बाद कांग्रेस के विधायक हेमंत कटारे और आतिफ अकील ने इस प्रक्रिया को अदालत में चुनौती देने की घोषणा की है।
हरदीप सिंह पुरी का कार्यकाल और मध्यप्रदेश पर प्रभाव
हरदीप सिंह पुरी का राज्यसभा में कार्यकाल अप्रैल 2030 तक रहेगा। इससे मध्यप्रदेश में भाजपा की राज्यसभा में संख्या बढ़कर 10 हो गई है। उनका मध्यप्रदेश से निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित होना पार्टी के लिए राजनीतिक मजबूती का संकेत माना जा रहा है।



