सुप्रीम कोर्ट ने आजम खान की याचिका खारिज की, जिससे उनका मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष जाएगा। यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने सुनवाई के बाद सुनाया।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका सीधे नहीं सुनी, इलाहाबाद हाई कोर्ट को भेजा मामले का रिकॉर्ड
सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा आजम खान की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार किया। कोर्ट ने मामले को इलाहाबाद हाई कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को आदेश दिया कि वे दो दिनों के भीतर सभी रिकॉर्ड इलाहाबाद हाई कोर्ट को सौंप दें। साथ ही, इलाहाबाद हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को 16 नवंबर 2026 को इस मामले को डिवीजन बेंच के सामने सूचीबद्ध करने और उसी दिन अंतरिम राहत पर आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया।
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आजम खान की गिरफ्तारी और हिरासत की जानकारी
प्रवर्तन निदेशालय ने आजम खान को 31 अक्टूबर 2026 को मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत गिरफ्तार किया था। इसके बाद गाजियाबाद की विशेष अदालत ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। इससे पहले आजम खान को दोहरे पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट से जमानत मिली थी।
आजम खान की ओर से दलीलें और वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की पैरवी
आजम खान की याचिका में उनके वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मोहम्मद निज़ामुद्दीन पाशा ने पैरवी की। कपिल सिब्बल ने दावा किया कि 29 अक्टूबर 2026 को दोहरे पैन कार्ड मामले में जमानत मिलने के तुरंत बाद ED ने उन्हें राजनीतिक द्वेष के तहत गिरफ्तार किया। उन्होंने यह भी बताया कि आजम खान के खिलाफ 2017 के बाद से कुल 95 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से कई अभी भी अदालतों में लंबित हैं।

सुप्रीम कोर्ट का हाई कोर्ट पर भरोसा और मामले की सुनवाई का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इलाहाबाद हाई कोर्ट हर संभव स्तर पर आजम खान की मदद कर रहा है। इसलिए शीर्ष अदालत ने सीधे हस्तक्षेप करने की बजाय इस मामले को हाई कोर्ट के अधिकार क्षेत्र में भेजने को उचित माना। चीफ जस्टिस ने स्पष्ट किया कि 16 नवंबर को डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई होनी चाहिए और उसी दिन अंतरिम राहत पर निर्णय लिया जाना चाहिए।
मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय अनियमितताओं के मामले का संदर्भ
ईडी ने आजम खान पर मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट से जुड़ी वित्तीय अनियमितताओं की जांच के तहत कार्रवाई की है। आरोप है कि विश्वविद्यालय के निर्माण में करोड़ों रुपये के सरकारी फंड का दुरुपयोग हुआ। इस मामले में ईडी ने विश्वविद्यालय से जुड़ी संपत्तियों को अस्थायी तौर पर कुर्क भी किया है।



