सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल फ्रॉड में बैंकों की जवाबदेही तय करते हुए निर्देश दिया है कि अगर बैंक की लापरवाही के कारण ग्राहक को नुकसान होता है तो उसे मुआवजा दिया जाएगा। 29 अक्टूबर 2026 को चीफ जस्टिस सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने इस मामले में गंभीर टिप्पणी की।
डिजिटल फ्रॉड में बैंक की लापरवाही पर मुआवजे का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि डिजिटल फ्रॉड के मामलों में अगर जांच से साबित होता है कि बैंक ने उचित जांच-पड़ताल यानी ड्यू डिलिजेंस नहीं की, तो बैंक को नुकसान की भरपाई करनी होगी। यह मुआवजा कम-से-कम गुमाए गए पैसों के बराबर होना चाहिए। अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि वित्तीय संस्थान सिर्फ लेन-देन की सुविधा नहीं दे सकते, बल्कि संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखना भी उनकी जिम्मेदारी है।
👉 यह भी पढ़ें:
- CJI सूर्यकांत पर टिप्पणी पड़ी भारी, संजय राउत को सुप्रीम कोर्ट ने दिए पेश होने के निर्देश
- CJI सूर्यकांत ने चुनाव आयोग से पूछा: एड्रेस बदलने पर फॉर्म-6 क्यों जरूरी?
- यशवंत वर्मा केस में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज का सवाल: नकदी में आग कैसे लगी, जांच में क्यों नहीं पता चला?
- जयराम रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के हलफनामे को भ्रामक बताया
- चुनाव आयोग ने SC में दिया जवाब, निर्णय प्रक्रिया में सभी आयुक्तों की ली जाती है राय
- SBI के 3,897 ग्राहकों के डेटा लीक, नाम-मोबाइल-पता डार्क वेब पर हुआ एक्सपोज़

संदिग्ध लेन-देन पर बैंक की सतर्कता जरूरी
कोर्ट ने कहा कि बैंकों को ग्राहक के आम ट्रांजैक्शन पैटर्न की निगरानी करनी चाहिए। अगर कोई असामान्य लेन-देन होता है, जैसे सामान्य से अधिक धनराशि का निकासी या ट्रांसफर, तो बैंक को तुरंत अलर्ट जारी करना चाहिए। इसके अलावा, संदिग्ध गतिविधियों की स्वत: रिपोर्टिंग और आवश्यक जांच भी जरूरी है।
आरबीआई के KYC संशोधन निर्देशों की समीक्षा
सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक के ‘KYC संशोधन निर्देश 2026’ की समीक्षा करने का भी निर्णय लिया है। इन नियमों को 30 नवंबर तक अधिसूचित और 31 दिसंबर तक लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। अदालत का मानना है कि ये निर्देश ग्राहक पहचान और संदिग्ध लेन-देन की निगरानी को मजबूत करेंगे, जिससे डिजिटल फ्रॉड में कमी आएगी।
डिजिटल फ्रॉड के मामलों में कमी और वित्तीय नुकसान
अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी ने बताया कि डिजिटल अरेस्ट के मामलों में पिछले साल के मुकाबले करीब 50% कमी आई है। हालांकि, इस साल अब तक लगभग ₹800 करोड़ का वित्तीय नुकसान दर्ज किया गया है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नुकसान डिजिटल फ्रॉड की गंभीरता को दर्शाता है और रोकथाम के लिए कड़े कदम जरूरी हैं।
म्यूल अकाउंट्स और असामान्य लेन-देन पर नियंत्रण
कोर्ट ने म्यूल अकाउंट्स की समस्या पर भी चिंता जताई है। ये खाते साइबर अपराधियों द्वारा पैसों को ट्रांसफर करने और धोखाधड़ी के लिए इस्तेमाल होते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने बैंकिंग संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे ऐसे खातों की पहचान करें और संदिग्ध लेन-देन को रोकने के लिए तत्काल कार्रवाई करें।
व्हाट्सएप पर प्रतिबंधित संदिग्ध खातों की संख्या
सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि साइबर फ्रॉड से जुड़े लगभग 9,400 संदिग्ध व्हाट्सएप खातों को प्रतिबंधित किया गया है। यह कार्रवाई डिजिटल फ्रॉड के खिलाफ सरकारी प्रयासों का हिस्सा है, जिससे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर धोखाधड़ी को कम किया जा सके।



