आजम खान और बेटे अब्दुल्ला आजम को दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से जमानत मिल गई है। यह राहत न्यायमूर्ति समित गोपाल की एकलपीठ ने 29 अक्टूबर 2026 को सुनाया है। कोर्ट ने दोनों की सजा को निलंबित करते हुए जमानत मंजूर की, लेकिन दोषसिद्धि पर रोक लगाने की याचिका को खारिज कर दिया।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैनकार्ड मामले में जमानत दी
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दो पैनकार्ड मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम की जमानत याचिका को स्वीकार कर उनकी सात-सात साल की सजा को निलंबित कर दिया। इस फैसले से पहले 15 अक्टूबर को सुनवाई पूरी की गई थी, जिसके बाद अदालत ने अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। हालांकि, कोर्ट ने दोषसिद्धि पर रोक लगाने की मांग को खारिज करते हुए यह स्पष्ट किया कि जमानत केवल सजा के निलंबन के लिए है।
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दो पैनकार्ड मामले की पृष्ठभूमि और आरोप
यह मामला अब्दुल्ला आजम द्वारा अलग-अलग जन्मतिथियों वाले दो पैनकार्ड रखने और चुनावी दस्तावेजों में उनका उपयोग करने से जुड़ा है। अभियोजन पक्ष का आरोप है कि दोनों पैनकार्ड का गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया था, जिससे चुनावी प्रक्रिया प्रभावित हुई। इस मामले में रामपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने दोनों को 7-7 साल की सजा सुनाई थी।
निचली अदालत की सजा और हाईकोर्ट की भूमिका
निचली अदालत ने दो पैनकार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम को सात साल की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम के लिए दस साल और जुर्माना बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दिया। बेटे अब्दुल्ला की सजा बरकरार रखी गई, लेकिन जुर्माना बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये किया गया। इन फैसलों के खिलाफ दोनों ने हाईकोर्ट में पुनरीक्षण याचिका दायर की थी।

जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई पर कानूनी जटिलताएं
हालांकि हाईकोर्ट ने दो पैनकार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला को जमानत दी है, लेकिन उनकी जेल से रिहाई अन्य लंबित मामलों और कानूनी प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, जमानत मिलना राहत है, लेकिन जेल से बाहर आने का निर्णय अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी ED की कार्रवाई
इसी बीच, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की संपत्तियों को पीएमएलए के तहत जब्त कर लिया है। यह कार्रवाई विश्वविद्यालय की जमीन और भवनों पर हुई, जिनकी कीमत लगभग 1170 करोड़ रुपये आंकी गई है। ED की जांच में पाया गया कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर विश्वविद्यालय के निजी परिसर में सरकारी काम कराए गए।
आगे की संभावनाएं और राजनीतिक असर
दो पैनकार्ड मामले में हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद आजम खान और उनके बेटे की कानूनी लड़ाई में नया मोड़ आया है। यह फैसला आगामी चुनावों में उनकी राजनीतिक भागीदारी को भी प्रभावित कर सकता है। वहीं, आम जनता के लिए यह मामला भ्रष्टाचार और चुनावी नियमों के उल्लंघन के प्रति न्यायिक सख्ती का उदाहरण है। आने वाले समय में कोर्ट के अन्य फैसले भी इस मामले की दिशा तय करेंगे।



