ईडी ने आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन-इमारतें अटैच कीं, जो मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत एक महत्वपूर्ण कदम है। यह कार्रवाई 28 अक्टूबर 2026 को प्रवर्तन निदेशालय के लखनऊ जोनल कार्यालय द्वारा की गई। आजम खान और उनके ट्रस्ट पर सरकारी धन के दुरुपयोग और अवैध कब्जे के गंभीर आरोप हैं।
जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति की जब्ती और उसकी कीमत
ईडी ने रामपुर जिले के जौहर नगर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की संपत्ति को अटैच किया है। इस संपत्ति की बुक वैल्यू 426.46 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि इसकी वर्तमान बाजार कीमत लगभग 1170 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह परिसर ग्राम सिंघणखेड़ा में फैला हुआ है और इसमें कई इमारतें तथा जमीन शामिल हैं।
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यह कार्रवाई प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत की गई है, जिसके तहत अपराध से प्राप्त आय की संपत्तियों को अटैच किया जाता है।

किसानों की जमीन पर अवैध कब्जे के मामले में जांच
ईडी की जांच रामपुर के अजीम नगर पुलिस स्टेशन में दर्ज 26 एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी। इन एफआईआर में किसानों की कृषि भूमि पर जबरन कब्जा करने का आरोप था। जिला प्रशासन की रिपोर्ट में पाया गया कि लगभग 34 एकड़ शत्रु संपत्ति पर यूनिवर्सिटी ने अवैध कब्जा कर रखा था।
यह जमीन पहले ट्रस्ट को पट्टे पर दी गई थी, लेकिन अनुमति रद्द होने के बाद भी इसका उपयोग यूनिवर्सिटी के लिए जारी रहा। बाद में इस जमीन का कब्जा वापस भी लिया गया।
सरकारी धन के दुरुपयोग के गंभीर आरोप
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि यूनिवर्सिटी के निर्माण में सरकारी धन और ठेकों का गलत इस्तेमाल हुआ है। लोक निर्माण विभाग के ठेकेदारों ने कुल ₹186 करोड़ के ठेकों में से 30-40 प्रतिशत राशि यूनिवर्सिटी के निर्माण में लगाई।
इसके अलावा, सरकारी फंड से बने पंडाल और छात्रावास जैसे निर्माण भी यूनिवर्सिटी की निजी संपत्ति में शामिल किए गए। खासतौर पर पंडाल का मालिकाना हक संस्कृति विभाग के बजाय यूनिवर्सिटी को दे दिया गया, जो विवादित है।
संपत्ति के मूल्यांकन और ट्रस्ट के खर्च का अंतर
जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट अनुसार, यूनिवर्सिटी के 59 भवनों का निर्माण ₹494.46 करोड़ में हुआ। वहीं, ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में केवल ₹78.32 करोड़ का खर्च दिखाया।
ईडी ने ₹426.46 करोड़ की राशि के स्रोतों का संतोषजनक हिसाब नहीं मिलने के कारण यह संपत्ति अटैच की है। इसके अलावा, ट्रस्ट को मेरठ की दो संस्थाओं से ₹6.24 करोड़ का चंदा मिला है, जो राजनीतिक प्रभाव के जरिए प्राप्त माना जा रहा है।
नए एफआईआर और अन्य जांचें
13 अक्टूबर 2026 को यूपी पुलिस ने आजम खान और ट्रस्ट के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित नई FIR दर्ज की। इसके अलावा, रामपुर में दर्ज 28 अन्य FIR की जांच भी ईडी कर रही है।
इन मामलों में आरोप हैं कि 2016 में कई घर बुलडोजर से ढहा दिए गए और उनका मलबा यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाया गया। साथ ही, नगर पालिका की सफाई मशीनें भी यूनिवर्सिटी में भेजी गईं।
और बढ़ेंगी आज़म खान की मुश्किलें
इस संपत्ति की जब्ती के बाद जांच का दायरा और बढ़ सकता है। न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे के फैसले आएंगे, लेकिन इस कार्रवाई से आजम खान और उनके ट्रस्ट की मुश्किलें बढ़ेंगी।
आम लोगों पर इसका असर भी होगा, खासकर उन किसानों और स्थानीय निवासियों पर जिनकी जमीन पर अवैध कब्जे के आरोप हैं। साथ ही, सरकारी धन के दुरुपयोग की जांच से सरकारी संस्थानों में पारदर्शिता की मांग बढ़ेगी।



