– डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार
रामायण पार्ट वन देख आया। इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत VFX यानी दृश्य संसार है।….. केवल दृश्य संसार ही है !
– इसमें रामायण अधूरी है – सीता के हरण के बाद राम के संकल्प के साथ फिल्म का यह पार्ट ख़त्म हो जाता है।
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– रावण बने यश की शानदार स्क्रीन प्रेजेंस है खासकर शिव तांडव स्रोत के समय का नृत्य और सूर्पणखा प्रकरण के बाद रावण का मोनोलॉग – चुप रहा जाये या युद्ध किया जाये, बहुत शानदार है।
– सीता बनी साई पल्लवी को ज़्यादा डायलॉग्स नहीं मिले, लेकिन उन्होंने आँखों ही आँखों में बहुत संवाद बोले।
– इसमें रावण एक सिरवाला ही है। वह बहुत बड़ा योद्धा, ज्योतिषी, संगीतकार, मायावी और शिवभक्त है। अगले पार्ट में जब रावण का मुकाबला राम से होगा तब उसके सर भी दस हो जायेंगे।
– फिल्म का पार्श्व संगीत ज़बरदस्त है। राम के वनवास के समय संगीत लोगों को रुला देता है और सीता हरण के समय बेचैन कर देता है।
– मेरी निजी राय है कि रामायण कोई राम और रावण के बीच युद्ध की कहानी नहीं है। यह मनुष्य के भीतर चलने वाले संघर्ष की कहानी भी है। रामायण जैसी कथा में केवल घटनाओं का होना पर्याप्त नहीं है। हर घटना के पीछे भावनाएं, रिश्ते, धर्मसंकट और जीवन दर्शन भी हैं। फिल्म जब इन पहलुओं को पर्याप्त समय नहीं दे पाती, तब उसका असर कम हो जाता है।
– रामायण जैसी कथा में केवल घटनाओं का होना पर्याप्त नहीं है। हर घटना के पीछे भावनाएं, रिश्ते, धर्मसंकट और जीवन दर्शन भी हैं। फिल्म जब इन पहलुओं को पर्याप्त समय नहीं दे पाती, तब उसका असर कम हो जाता है।
– फिल्म फिल्म के पहले पार्ट की कहानी रावण के उत्थान, उसकी शक्तियों, भगवान विष्णु के राम अवतार, राम और सीता के विवाह, कैकेयी के वरदान, वनवास और सीता हरण की घटनाओं को लेकर आगे बढ़ती है। यह पहला भाग है। इसलिए राम-रावण का निर्णायक संघर्ष की जमीन तैयार करती है, जो आगे दूसरे भाग में दिखाई देगा।

तकनीक के मामले में यह भारतीय सिनेमा की छलांग है। केवल उन दृश्यों के लिए भी फिल्म देखी जा सकती है। अयोध्या की भव्यता, सोने की लंका का वैभव, विशाल महल, प्राकृतिक दृश्य और पौराणिक दुनिया की कल्पना सब कुछ बड़े पैमाने पर रचा गया है। जटायु और रावण के बीच का टकराव भी VFX और एक्शन के मेल का उल्लेखनीय उदाहरण है। इस तरह के दृश्यों में तकनीक सिर्फ सजावट नहीं बनती, बल्कि कहानी को आगे बढ़ाने का माध्यम भी बनती है।
फिल्म में युद्ध के दृश्य, विशाल सेनाओं का संयोजन और पौराणिक परिवेश को जीवंत करने की कोशिश भी प्रभावित करती है। प्रोडक्शन डिजाइन, वेशभूषा, सिनेमैटोग्राफी और एक्शन कोरियोग्राफी मिलकर इस दुनिया को विश्वसनीय बनाने का प्रयास करते हैं। खास तौर पर बड़े पर्दे पर इन दृश्यों का विस्तार और भव्यता अच्छा अनुभव देते हैं। एक तरफ लंका और युद्ध का विराट संसार है, दूसरी तरफ कुछ राक्षसी आकृतियां हैं जो दर्शकों को उस काल्पनिक दुनिया से बाहर खींच लेती हैं।
लेकिन हर जगह तकनीक का जादू नहीं चलता। कुछ राक्षसों और मायावी जीवों के दृश्यों में VFX कृत्रिम लगता है। उनके चेहरे, शरीर की बनावट और हरकतों में वह स्वाभाविकता नहीं दिखती, जिसकी अपेक्षा इतने बड़े बजट और तकनीकी दावों वाली फिल्म से की जाती है। कुछ जगह ऐसा लगता है कि कलाकार किसी वास्तविक संसार में नहीं, बल्कि कंप्यूटर से बनाई गई पृष्ठभूमि के सामने अभिनय कर रहे हैं।
कुमार विश्वास के संवाद सादे हैं –
रावण कहता है :
-जो राख से उठा हो, वह आग से नहीं डरता!
राम कहते हैं :
– रिश्तों का कोई धर्म नहीं होता।
– सीते, तुम्हारे बिना मुझे स्वर्ग भी स्वीकार नहीं !
– हम रघुवंशी, युद्ध के निमंत्रण से नहीं डरते !
अगस्त्य कहते हैं :
– जाओ राम, एक सम्पूर्ण योद्धा के रूप में यह तुम्हारा प्रथम दिवस है।
जब दर्शक फिल्म देखकर बाहर निकालता है तब कुछ देर VFX की छवियां दिमाग में रहती हैं, पर कोई गाना, कोई भजन या धुन उसे याद नहीं रहती क्योंकि फिल्म में ऐसा कुछ है ही नहीं।
रामायण पार्ट वन : देखनीय !

– डॉ. प्रकाश हिन्दुस्तानी, वरिष्ठ पत्रकार



