देवी अहिल्या विश्वविद्यालय (DAVV) में गर्भ संस्कार की पढ़ाई जल्द ही शुरू होगी। यह नया पाठ्यक्रम गर्भ संस्कार के महत्व को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है और इसमें योग, पोषण और मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष प्रशिक्षण शामिल होगा।
DAVV में गर्भ संस्कार का नया सर्टिफिकेट कोर्स
देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ योग और लाइफलोंग लर्निंग विभाग ने गर्भ संस्कार के लिए तीन महीने का सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का निर्णय लिया है। यह कोर्स योग, ध्यान, आहार-विहार और आयुर्वेदिक जीवनशैली पर आधारित होगा।
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इस कोर्स का उद्देश्य गर्भवती महिलाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। साथ ही, गर्भस्थ शिशु के सर्वांगीण विकास में भी सहायक होना है।
गर्भ संस्कार में योग और पोषण की भूमिका
इस पाठ्यक्रम में योग और पोषण को प्रमुख विषय के रूप में शामिल किया गया है। योगाभ्यास और ध्यान से मानसिक तनाव कम होता है। पोषण संबंधी प्रशिक्षण गर्भवती महिलाओं को सही आहार लेने में मदद करेगा।
इस प्रकार, गर्भ संस्कार की पढ़ाई से महिलाओं को स्वस्थ गर्भावस्था के लिए जरूरी ज्ञान मिलेगा।
मानसिक स्वास्थ्य और प्राचीन आयुर्वेदिक जीवनशैली की ट्रेनिंग
गर्भ संस्कार पाठ्यक्रम में मानसिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। गर्भवती महिलाओं के लिए तनाव प्रबंधन और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देना शामिल है।
इसके अलावा, आयुर्वेदिक जीवनशैली के सिद्धांतों को भी सिखाया जाएगा, जो सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं।
लक्षित वर्ग और कोर्स के लाभ
यह कोर्स योग प्रशिक्षकों, पोषण विशेषज्ञों, स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं और गर्भवती महिलाओं की देखभाल करने वालों के लिए उपयुक्त है। इससे वे गर्भ संस्कार के क्षेत्र में विशेषज्ञ बन सकेंगे।
कोर्स पूरा करने के बाद प्रतिभागी बेहतर तरीके से गर्भावस्था की देखभाल कर पाएंगे और समाज में स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाने में योगदान देंगे।
DAVV का उद्देश्य और नई शिक्षा नीति के अनुरूप पहल
DAVV प्रशासन का लक्ष्य है कि भारतीय पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान के साथ जोड़कर रोजगारोन्मुखी पाठ्यक्रम विकसित किए जाएं। यह पहल नई शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत आती है।
इससे विद्यार्थियों को व्यावहारिक और सामाजिक रूप से उपयोगी शिक्षा मिलेगी जो वर्तमान समय की मांग के अनुरूप है।
आगे की संभावनाएं और सामाजिक प्रभाव
गर्भ संस्कार की पढ़ाई से सम्बंधित इस कोर्स से न केवल शैक्षणिक क्षेत्र में सुधार होगा बल्कि सामाजिक स्तर पर भी मातृत्व स्वास्थ्य में सुधार आएगा।
इस पहल से गर्भवती महिलाओं को बेहतर देखभाल मिलेगी और स्वस्थ नए जीवन की नींव मजबूत होगी।



