तेल की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच भारतीय शेयर बाजार में सेंसेक्स-निफ्टी में गिरावट दर्ज की गई है। 14 अक्टूबर 2026 को कारोबार के दौरान बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के कारण निवेशक सतर्क नजर आए।
सेंसेक्स-निफ्टी में आई गिरावट के आंकड़े
बीएसई सेंसेक्स ने 251.89 अंक यानी 0.34 प्रतिशत की गिरावट के साथ 72,781.89 के स्तर पर कारोबार बंद किया। वहीं, एनएसई निफ्टी 50 में 99.25 अंक (0.44%) की गिरावट आई और यह 22,622.70 पर बंद हुआ। पिछले सत्र की 1.6% बढ़त के बाद मुनाफावसूली के चलते दोनों सूचकांक अपने दिन के उच्चतम स्तर से नीचे आ गए। इससे बाजार में निवेशकों की सतर्कता बढ़ गई है।
👉 यह भी पढ़ें:
- शेयर बाजार में तेजी: सेंसेक्स-निफ्टी में उछाल, निवेशकों के चेहरे पर खुशहाली
- शेयर बाजार में भारी गिरावट: सेंसेक्स 550 अंक टूटा, निवेशकों को झटका
- शेयर बाजार में जबरदस्त उछाल, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से बढ़ा निवेशकों का भरोसा
- शेयर बाजार में सेंसेक्स 1100 अंक गिरा, निवेशकों के 11 लाख करोड़ डूबे
- रेपो रेट बढ़ने से बाजार में गिरावट, सेंसेक्स 429 अंक टूटा
- शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 2 दिन में लगभग 1100 अंक चढ़ा

तेल की कीमतों में वृद्धि और वैश्विक तनाव
वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड की कीमत 106 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है, जबकि अमेरिकी डब्ल्यूटीआई क्रूड लगभग 94.76 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है। मध्य पूर्व में बढ़े भू-राजनीतिक तनाव ने तेल की आपूर्ति पर असर डाला है। इस कारण भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए महंगाई और चालू खाते का घाटा बढ़ने की आशंका है।
विदेशी संस्थागत निवेशकों की निरंतर बिकवाली
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने 13 अक्टूबर को लगातार 13वें कारोबारी सत्र में लगभग ₹1,305 करोड़ के शेयर बेचे। यह बिकवाली बाजार में दबाव का एक बड़ा कारण बनी है। विदेशी निवेशकों की निकासी से भारतीय बाजार की मौजूदा कमजोरी और गहराई है।

प्रमुख सेक्टर्स और शेयरों का प्रदर्शन
बैंकिंग, ऑटो और फाइनेंशियल सर्विसेज के शेयर जैसे श्रीराम फाइनेंस, बजाज फाइनेंस, और डॉ. रेड्डीज लैब्स में गिरावट देखी गई। इसके विपरीत, आईटी और एफएमसीजी सेक्टर ने बाजार में कुछ राहत दी। इंफोसिस, टीसीएस, नेस्ले इंडिया और टाटा कंज्यूमर जैसे शेयरों ने सकारात्मक प्रदर्शन किया।
क्षेत्रवार बाजार का हाल
निफ्टी आईटी, एनर्जी, ऑयल एंड गैस और एफएमसीजी सेक्टर में 0.5% से 1% तक की बढ़त दर्ज हुई। वहीं, ऑटो, मेटल, रियल्टी, फार्मा और प्राइवेट बैंकिंग इंडेक्स में 0.3% से 0.9% तक की गिरावट आई। इससे स्पष्ट है कि निवेशक तेल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर चिंतित हैं और जोखिम से बचने की कोशिश कर रहे हैं।
रुपये की स्थिति और आगे की संभावनाएं
तेल की कीमतों में उछाल के बावजूद अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया ₹95.23 के स्तर पर मामूली मजबूती के साथ कारोबार करता नजर आया। यह आयात लागत पर कुछ राहत दे सकता है। हालांकि, यदि तेल की कीमतें लंबे समय तक उच्च बनी रहती हैं, तो महंगाई और ब्याज दरों में वृद्धि का दबाव बना रहेगा। निवेशकों को आगामी मौद्रिक नीति और वैश्विक आर्थिक हालात पर नजर रखनी होगी।



