विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने अल नीनो के कारण भारत में गर्मी और बीमारियों के बढ़ते खतरे की चेतावनी दी है। यह चेतावनी ऐसे समय में आई है जब देश के कई हिस्सों में वेक्टर-जनित बीमारियां बढ़ रही हैं।
अल नीनो के प्रभाव से स्वास्थ्य पर असर
अल नीनो के कारण तापमान में वृद्धि हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है। WHO ने बताया कि भारत में गर्मी की वजह से हीट एग्जॉशन और हीटस्ट्रोक के मामले बढ़ सकते हैं। इसके अलावा, अधिक गर्मी से दिल, सांस और किडनी से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। यह खासकर बुजुर्गों और बच्चों के लिए अधिक खतरनाक हो सकता है, क्योंकि उनकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की परिस्थितियों के चलते अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव बढ़ेगा।
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वेक्टर-जनित बीमारियों का बढ़ता खतरा
दिल्ली में डेंगू के मामले अगस्त में 90 तक पहुंच गए, जिससे इस साल कुल मामले 311 हो गए। इसी तरह, मलेरिया के मामले भी बढ़कर 53 हो गए। WHO के अनुसार, अल नीनो इन बीमारियों के जोखिम को बढ़ाने वाला कारक है। अधिक तापमान और नमी की स्थिति मच्छरों के प्रजनन को बढ़ावा देती है। इससे बचने के लिए स्वच्छता और मच्छरदानी का उपयोग आवश्यक हो जाता है। लोगों को जागरूक करना भी जरूरी है ताकि वे अपने आसपास के क्षेत्रों को साफ-सुथरा रखें।
मौसम बदलाव और कृषि पर असर
अल नीनो के कारण बारिश की कमी और अधिक गर्मी से अनाज के उत्पादन पर असर पड़ सकता है। पानी की उपलब्धता में कमी से खाद्य सुरक्षा पर भी खतरा मंडरा सकता है। यह स्थिति खासकर उन क्षेत्रों में गंभीर हो सकती है जहां जल निकासी और सफाई की व्यवस्था कमजोर है। किसानों के लिए यह समय कठिन हो सकता है, क्योंकि फसल उत्पादन में गिरावट से उनकी आय पर असर पड़ सकता है। यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
सीमावर्ती क्षेत्रों में संक्रमण का खतरा
WHO ने भारत-नेपाल और भारत-भूटान सीमाओं पर भी ध्यान दिलाया है। यहां लोगों के विस्थापन से सीमा पार बीमारियों के फैलने का खतरा बढ़ सकता है। सीमावर्ती क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी के कारण यह स्थिति और जटिल हो सकती है। सरकार को सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की आवश्यकता है ताकि संक्रमण को फैलने से रोका जा सके।
आगे की संभावनाएं
अगस्त से अक्टूबर तक दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में सामान्य से कम बारिश और अधिक तापमान की आशंका है। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। स्वास्थ्य विभाग को इस संभावित संकट के लिए तैयारी करनी चाहिए, ताकि आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें। इसके अलावा, आम जनता को भी अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की सलाह दी जाती है, जैसे कि अधिक जल का सेवन करना और धूप से बचाव के उपाय अपनाना।



