इंदौर। लगभग 33 साल से इंदौर विकास प्राधिकरण की योजना क्रमांक 171 तथा 77 में अपने प्लॉट का इंतजार कर रहे लोगों के सब्र का बांध गुरुवार को टूट गया। लोग बैनर-पोस्टर लेकर नारे लगाते हुए आईडीए पहुंच गए और इंसाफ की मांग की। संभागायुक्त और आईडीए चेयरमेन भास्कर लक्षकार मौके पर पहुंचे और लोगों को समझाइश दी।
आईडीए के इन स्कीमों के पीड़ित लोग पुष्प विहार कॉलोनी प्लॉटधारक समूह तथा अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण समिति की बैनर तले प्रदर्शन करने पहुंचे थे। पीड़ितों ने आईडीए के खिलाफ न्याय यात्रा निकालने का ऐलान पहले से ही किया था। इसके तहत गुरुवार सुबह काफी संख्या में लोग आईडीए पहुंचे और जमकर नारेबाजी की।
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संभागायुक्त ने पहुंचकर समझाया
आईडीए में प्रदर्शन के बाद पीड़ित संभागायुक्त कार्यालय तक यात्रा निकालने वाले थे, लेकिन संभागायुक्त खुद ही आईडीए पहुंच गए। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि आप लोग आने वाले हैं तो मैं खुद यहां आ गया। संभागायुक्त ने धूप में खड़े लोगों को छांव में कराया और खुद ही लोगों लेकर आईडीए कार्यालय में गए। संभागायुक्त के आने के तुरंत बाद कलेक्टर शिवम वर्मा भी मौके पर पहुंच गए। उन्होंने भी लोगों को समझाइश दी।
सीईओ ने अगली बैठक का दिया आश्वासन
प्रदर्शन के दौरान आईडीए सीईओ डॉ.परीक्षित झाड़े ने प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया कि अक्टूबर में होने वाली बोर्ड बैठक में इसका हल निकालेंगे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाइश भी दी।
33 साल से अटका है मामला
रहवासियों ने आरोप लगाया कि 33 वर्षों से वे अपनी जमीन और मकानों को लेकर असमंजस में हैं। उनका कहना है कि योजना की मुक्ति की प्रक्रिया में लगातार देरी की जा रही है, जबकि उनके मुताबिक योजना से संबंधित प्रतिफल राशि 22 दिसंबर 2024 को ही पूरी तरह जमा हो चुकी थी। प्रदर्शनकारियों ने आईडीए से योजना 171 की मुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट करने और पूरी प्रक्रिया को वैधानिक एवं पारदर्शी तरीके से आगे बढ़ाने की मांग की। समिति ने चेतावनी दी कि यदि सात दिन में ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो वह न्यायालय और अन्य वैधानिक मंचों का रुख करेगी।
बोर्ड संकल्प पर उठाए गंभीर सवाल
योजना से प्रभावित लोगों ने 8 अगस्त 2025 को हुई आईडीए बोर्ड बैठक के संकल्प पर भी सवाल उठाए हैं। उनका दावा है कि बैठक से पहले ही 22 दिसंबर 2024 को प्रतिफल राशि पूरी जमा हो चुकी थी, इसके बावजूद बोर्ड के संकल्प क्रमांक 169 में इस तथ्य का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया। समिति के मुताबिक, 5 दिसंबर 2024 को अपर कलेक्टर के नेतृत्व में गठित पांच सदस्यीय समिति ने योजना 171 से संबंधित 116 आपत्तियों के निराकरण की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। इसमें प्रतिफल राशि 5.84 करोड़ के बजाय 5.89 करोड़ रुपये प्राप्त होने की जानकारी भी सामने आई थी। रहवासियों का आरोप है कि इसके बावजूद बोर्ड के निर्णय में प्रतिफल राशि जमा होने के महत्वपूर्ण तथ्य को शामिल नहीं किया गया।
योजना को टुकड़ों में जारी रखने पर भी आपत्ति
प्रदर्शनकारियों ने 8 अगस्त 2025 की बैठक में सहकारी संस्थाओं की भूमि को छोड़कर शेष सरकारी और निजी भूमि पर योजना को लेकर विचार करने के फैसले पर भी आपत्ति जताई है। समिति का कहना है कि यदि योजना से संबंधित निर्धारित प्रतिफल राशि पूर्ण रूप से जमा हो चुकी है तो योजना की वैधानिक स्थिति पर स्पष्ट निर्णय होना चाहिए। इसके विपरीत योजना को अलग-अलग हिस्सों में जारी रखने और कुछ हिस्सों को मुक्त करने का निर्णय लिया गया, जिसे समिति ने विधि विरुद्ध बताया है। समिति का आरोप है कि इसके बाद हुई बोर्ड बैठकों में भी योजना 171 के विषय को प्राथमिकता से नहीं लिया गया, जिससे योजना की मुक्ति में अनावश्यक विलंब हुआ।
सहकारी संस्थाओं की जांच को बताया अलग प्रक्रिया
हाल के दिनों में सहकारी संस्थाओं की जांच और लंबित ऑडिट पूरा कराने की प्रक्रिया तेज होने की खबरों पर भी रहवासियों ने सवाल उठाए हैं। समिति का कहना है कि सहकारी संस्थाओं की जांच एक अलग प्रशासनिक प्रक्रिया है और इसका आधार बनाकर योजना की मुक्ति को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकता। रहवासियों का तर्क है कि यदि कुछ संस्थाओं का रिकॉर्ड वर्षों से उपलब्ध नहीं है तो इसके लिए योजना से प्रभावित परिवारों को अनिश्चितता में रखना उचित नहीं है।
अयोध्यापुरी के एनओसी पर भी उठे सवाल
प्रदर्शन में अयोध्यापुरी कॉलोनी का एनओसी विवाद भी प्रमुख मुद्दा रहा। अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण समिति ने कहा कि वर्षों से यहां रहने वाले परिवार अपनी संपत्ति, निर्माण, नामांतरण और अन्य वैधानिक कार्यों को लेकर परेशान हैं। समिति ने आरोप लगाया कि परिवारों को मकान निर्माण के अधिकार से भी अनिश्चितता के कारण वंचित होना पड़ रहा है। अयोध्यापुरी रहवासी कल्याण समिति ने आईडीए को सात दिन का समय दिया है।
आईडीए अधिकारियों ने उलझाया मामला
इस पूरे मामले में लोगों का कहना है कि आईडीए के पूर्व और वर्तमान सीईओ तथा अन्य अफसरों के कारण ही मामला उलझा हुआ है। लंबे समय से मांग करने के बावजूद भी वे बोर्ड बैठक में कोई फैसला नहीं ले रहे। हर बार कोई न कोई उलझन पैदा करने की कोशिश हो रही है।



