सिकल सेल जाँच के लिए इंदौर के महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (MGM) के महाराजा यशवंतराव अस्पताल में एक नई सुविधा शुरू की जा रही है। इस पहल के तहत, नवजात शिशुओं की ‘न्यूबॉर्न स्क्रीनिंग’ जन्म के 24 घंटे के भीतर की जाएगी।
केंद्र सरकार का सहयोग
सिकल सेल जाँच की इस सुविधा को केंद्र सरकार का महत्वपूर्ण सहयोग प्राप्त हुआ है। जनजातीय कार्य मंत्रालय की केंद्रीय सचिव रंजना चोपड़ा ने हाल ही में इस केंद्र का दौरा किया। उन्होंने अस्पताल को आधुनिक तकनीक, उपकरण और वित्तीय सहायता प्रदान करने का आश्वासन दिया।

एचएलए टाइपिंग की शुरुआत
सिकल सेल जाँच के साथ ही, गंभीर मामलों के उपचार के लिए ‘एचएलए टाइपिंग’ सुविधा भी शुरू की जा रही है। यह प्रक्रिया बोन मैरो ट्रांसप्लांट की तैयारी के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इससे उपचार में सफलता की संभावना बढ़ जाती है।
आदिवासी क्षेत्रों के मरीजों को राहत
इस सुविधा से झाबुआ, आलीराजपुर, धार और बड़वानी जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों के मरीजों को काफी राहत मिलेगी। इन क्षेत्रों से आने वाले सिकल सेल के मरीजों का नियमित उपचार और प्रबंधन अब आसान होगा।

राष्ट्रीय मिशन से जुड़ाव
यह पहल केंद्र सरकार के ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ का हिस्सा है। इसका उद्देश्य शिशु मृत्यु दर को कम करना और बीमारी की समय पर पहचान करना है।
आगे की योजना
भविष्य में इस सुविधा का विस्तार किया जाएगा ताकि अधिक से अधिक मरीजों को इसका लाभ मिल सके। इसके अलावा, जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को सिकल सेल के लक्षणों और उपचार के बारे में जानकारी दी जाएगी।



