मध्य प्रदेश के जबलपुर में टी-72 टैंकों के ओवरहॉल के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना का शुभारंभ किया गया है। इस योजना की आधारशिला केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 27 अगस्त 2026 को रखी। टी-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना का उद्देश्य भारत की सैन्य क्षमता को मजबूत करना है।
टी-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना का महत्व
टी-72 टैंक ओवरहॉल परियोजना की स्थापना रक्षा सार्वजनिक उपक्रम आर्मर्ड व्हीकल्स निगम लिमिटेड (AVNL) के अंतर्गत आने वाली व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में की जा रही है। इस परियोजना की कुल लागत ₹472 करोड़ है। जबलपुर संयंत्र की स्थापित क्षमता प्रति वर्ष 80 टी-सीरीज़ टैंकों के ओवरहॉल की होगी, जिसमें टी-72 ‘अजेय’ और टी-90 ‘भीष्म’ शामिल हैं।
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भारतीय सेना की जरूरतें और ओवरहॉलिंग का अंतर
भारतीय सेना को प्रति वर्ष लगभग 230 टैंकों के ओवरहॉल की आवश्यकता होती है। वर्तमान में तमिलनाडु स्थित हैवी व्हीकल्स फैक्ट्री (HVF), अवाडी की क्षमता 150 टैंकों की है। जबलपुर का नया प्लांट शेष 80 टैंकों के अंतर को पूरा करेगा, जिससे भारतीय सेना की ओवरहॉलिंग जरूरतें पूरी होंगी।
आर्थिक और स्थानीय प्रभाव
यह परियोजना स्थानीय स्तर पर एमएसएमई (MSMEs) को नए अवसर प्रदान करेगी और रोजगार सृजित करेगी। मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और हाइड्रोलिक उपकरणों की आपूर्ति के क्षेत्र में स्थानीय उद्योगों को लाभ होगा। इसके अलावा, यह आत्मनिर्भर भारत अभियान को भी मजबूती प्रदान करेगा।

रक्षा मंत्री का वक्तव्य
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परियोजना के शिलान्यास के अवसर पर कहा कि यह देश की रक्षा तैयारियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आधुनिक युद्ध के दौर में भी टैंक जैसी पारंपरिक सैन्य शक्तियों का महत्व कम नहीं हुआ है।
आगे की योजनाएं और संभावनाएं
इस परियोजना के पूर्ण होने के बाद, जबलपुर देश का दूसरा बड़ा रक्षा हब बन जाएगा। चेन्नई के अवाडी के बाद, यह केंद्र भारतीय सेना को टैंकों के ओवरहॉल और उन्नयन की सुविधाएं प्रदान करेगा। परियोजना से देश की रक्षा उत्पादन क्षमता में भी वृद्धि होगी।
समारोह का आयोजन
समारोह के दौरान रक्षा मंत्री और मुख्यमंत्री ने विधिवत पूजा-अर्चना की और परियोजना का थ्री-डी डिस्प्ले देखा। कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत और वंदे मातरम् के साथ हुआ, जिससे देशभक्ति की भावना को बल मिला।



