रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने जबलपुर में व्हीकल फैक्ट्री जबलपुर (VFJ) में टी-सीरीज युद्धक टैंकों की ओवरहॉलिंग परियोजना का भूमि पूजन किया। इस परियोजना के माध्यम से भारत की सैन्य क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी।
जबलपुर में ₹472 करोड़ की ओवरहॉलिंग सुविधा
इस परियोजना की लागत ₹472 करोड़ आंकी गई है। यह परियोजना भारतीय सेना के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी। यहां टी-72 और टी-90 टैंकों की ओवरहॉलिंग की जाएगी, जिससे भारतीय सेना की परिचालन क्षमता में वृद्धि होगी। यह निवेश भारत की सुरक्षा को सशक्त बनाने की दिशा में एक ठोस कदम है। जबलपुर की इस परियोजना से स्थानीय उद्योगों को भी प्रोत्साहन मिलेगा, क्योंकि इससे रोजगार के नए अवसर उत्पन्न होंगे।

ओवरहॉलिंग संयंत्र की वार्षिक क्षमता
इस संयंत्र में प्रति वर्ष 80 टैंकों की ओवरहॉलिंग की जाएगी। इससे भारतीय सेना की 230 टैंकों की वार्षिक आवश्यकता पूरी करने में मदद मिलेगी। संयंत्र की यह क्षमता न केवल सेना की वर्तमान जरूरतों को पूरा करेगी, बल्कि भविष्य की आवश्यकताओं के लिए भी तैयार करेगी। इस पहल से देश को युद्ध के समय में तेजी से प्रतिक्रिया देने में सहायता मिलेगी।
सेना की जरूरतों की पूर्ति
इस परियोजना से पहले, आवडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्ट्री में सालाना 150 टैंकों की ओवरहॉलिंग होती थी। अब जबलपुर का संयंत्र शेष कमी को पूरा करेगा। इस संयंत्र के शुरू होने से सेना को समय पर टैंक उपलब्ध कराए जा सकेंगे। यह परियोजना भारतीय सेना की दक्षता को बढ़ाने में सहायक होगी।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम
इस परियोजना से देश की रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी। VFJ, जो रक्षा मंत्रालय के अधीन है, इस पहल के माध्यम से विदेशी निर्भरता को कम करेगा। यह आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। ओवरहॉलिंग की इस प्रक्रिया से न केवल विदेशी आयात पर निर्भरता घटेगी, बल्कि घरेलू उत्पादन को भी बढ़ावा मिलेगा।

कार्यक्रम में प्रमुख हस्तियों की उपस्थिति
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्य के मंत्री राकेश सिंह भी उपस्थित रहे। रक्षा मंत्री ने इस परियोजना के सामरिक महत्व को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं के साथ-साथ रक्षा विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। उनकी उपस्थिति ने इस परियोजना के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाया।
आधुनिक युद्ध की आवश्यकताएं
रक्षा मंत्री ने युद्धक टैंकों को सीमाओं पर ‘आयरन वॉल’ बताते हुए कहा कि यह परियोजना देश की जमीनी सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक युद्ध की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, इस प्रकार की परियोजनाएं अत्यंत आवश्यक हैं। यह पहल देश की सुरक्षा को मजबूत करते हुए दुश्मनों के प्रति कड़ा संदेश देगी।
अगले कदम
आने वाले समय में, इस परियोजना के तहत और भी नई तकनीकों को शामिल किया जाएगा। इससे ओवरहॉलिंग की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा। सरकार इस दिशा में लगातार निवेश कर रही है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि भारत की सेनाएं अत्याधुनिक उपकरणों से सुसज्जित रहें।



