नई दिल्ली। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। अचानक आई बाढ़ ने नदियों के आसपास बसे इलाकों, सड़कों, पुलों, घरों और बिजली तथा पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं को नुकसान पहुंचाया है। नेपाल के रासुवा जिले में आई इस आपदा का असर सिर्फ नेपाल तक सीमित नहीं है। नेपाल से भारत की ओर आने वाली नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका को देखते हुए बिहार और उत्तर प्रदेश के कई सीमावर्ती इलाकों में अलर्ट जारी किया गया है।
भोटेकोशी नदी ने मचाई भारी तबाही
बाढ़ का सबसे गंभीर असर नेपाल के रासुवा जिले में देखने को मिला है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से रसुवागढ़ी और टिमुरे क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुए। तेज बहाव अपने साथ वाहन, सामान, पुल और दूसरी संरचनाएं बहा ले गया। कई इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है और बिजली तथा संचार व्यवस्था को भी नुकसान पहुंचा है। कुछ जलविद्युत परियोजनाएं भी प्रभावित हुई हैं।
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सैकड़ों लोग लापता, 95 मृत
आपदा की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सैकड़ों लोगों के लापता होने की खबर है। अलग-अलग समय पर जारी आंकड़ों में मृतकों और लापता लोगों की संख्या में अंतर सामने आया है, क्योंकि दुर्गम इलाकों तक राहत एवं बचाव दलों की पहुंच मुश्किल बनी हुई है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल में मृतकों की संख्या 95 तक पहुंच गई थी और 400 से अधिक लोगों के लापता होने की सूचना थी। इनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है।
105 भारतीयों के लापता होने की खबर
नेपाल में आए इस जलप्रलय ने भारत की चिंता भी बढ़ा दी है। नेपाल पर्यटन बोर्ड से जुड़े शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 384 यात्रियों के लापता होने की सूचना थी। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक बताए गए। विदेशी नागरिकों में 105 भारतीय पर्यटक और 37 एनआरआई शामिल बताए गए हैं। बड़ी संख्या में लोग तीर्थयात्रा और पर्यटन के लिए नेपाल पहुंचे थे। भारत सरकार और नेपाल स्थित भारतीय मिशन प्रभावित भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनके परिजनों से संपर्क स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। भारतीय नागरिकों की सहायता के लिए हेल्पलाइन व्यवस्था भी सक्रिय की गई है। उत्तर प्रदेश सरकार ने भी नेपाल में फंसे राज्य के नागरिकों और पर्यटकों के लिए हेल्पलाइन जारी की है।
बिहार और उत्तर प्रदेश पर मंडरा रहा खतरा
नेपाल में आई बाढ़ का असर भारत के मैदानी इलाकों पर इसलिए भी पड़ सकता है क्योंकि हिमालय से निकलने वाली कई नदियां नेपाल से होकर भारत में प्रवेश करती हैं। इनमें नारायणी नदी भारत में गंडक के नाम से जानी जाती है। नेपाल में इसके जलग्रहण क्षेत्र में अचानक पानी बढ़ने पर उसका असर नीचे की ओर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में दिखाई दे सकता है। बिहार में प्रशासन ने गंडक नदी के संभावित जलस्तर बढ़ने को लेकर निगरानी बढ़ा दी है। तटबंधों की जांच, रात में गश्त और निचले इलाकों में सतर्कता जैसे कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने संभावित स्थिति से निपटने के लिए प्रशासनिक मशीनरी को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश में भी नेपाल से सटे और नदियों के प्रभाव वाले इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है। अधिकारियों को जलस्तर पर लगातार नजर रखने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है। बाढ़ की आशंका को देखते हुए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी एनडीआरएफ की टीमें भी बिहार और उत्तर प्रदेश में तैयार रखी गई हैं।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ
नेपाल की इस प्राकृतिक आपदा के बीच भारत ने पड़ोसी देश के साथ खड़े होने का भरोसा दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात कर बाढ़ से हुई जनहानि पर दुख जताया और नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता एवं राहत मदद उपलब्ध कराने की पेशकश की। भारत ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। भारतीय वायुसेना के C-17, C-130J और C-295 विमानों को जरूरत पड़ने पर राहत सामग्री और दूसरी आवश्यक सहायता पहुंचाने के लिए स्टैंडबाय पर रखा गया है। इसका उद्देश्य नेपाल की जरूरत के मुताबिक तत्काल मानवीय सहायता पहुंचाना है।



