भारत की पहली महिला मिमिक्री आर्टिस्ट आशा सिंह का निधन 22 अगस्त 2026 को मुंबई में हुआ। आशा सिंह, जिन्हें मीना कुमारी की नकल के लिए जाना जाता है, ने 84 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनका जीवन प्रेरणा का स्रोत था, जिसे वे अपनी कला और योगदान के माध्यम से लोगों के दिलों में जीवित रखेंगी।
महाभारत की कृपी का यादगार किरदार
आशा सिंह ने बी.आर. चोपड़ा के ऐतिहासिक टीवी धारावाहिक ‘महाभारत’ में द्रोणाचार्य की पत्नी कृपी का किरदार निभाया था। यह किरदार उन्हें घर-घर में प्रसिद्धि दिलाने वाला साबित हुआ। 1980 के दशक में प्रसारित ‘महाभारत’ ने भारतीय टेलीविजन पर एक अमिट छाप छोड़ी। कृपी का किरदार निभाकर, उन्होंने न केवल अपनी अभिनय क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि भारतीय नारीत्व के धैर्य और शक्ति को भी दर्शाया।
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कृपी के चरित्र में उन्होंने जिस तरह से भावनाओं को व्यक्त किया, वह दर्शकों के दिलों को छू गया। उनकी संवाद अदायगी और भावभंगिमा ने उन्हें एक कुशल अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया। उस समय, जब महिला कलाकारों के लिए सीमित भूमिकाएं होती थीं, आशा सिंह ने इस चुनौतीपूर्ण किरदार को निभाकर एक मिसाल कायम की।

मीना कुमारी की नकल में माहिर
आशा सिंह को विशेष रूप से मीना कुमारी की आवाज की हूबहू नकल करने के लिए जाना जाता था। उनकी इस कला ने उन्हें फिल्म उद्योग में अलग पहचान दी। मिमिक्री का यह हुनर उन्होंने बचपन से ही विकसित किया था। मीना कुमारी की नकल करते हुए उन्होंने उनकी भावनात्मक गहराई को छूने की कोशिश की, जो श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर देती थी।
इस कला के माध्यम से उन्होंने कई मंचों पर प्रदर्शन किया। उनके शो हमेशा हाउसफुल रहते थे। आशा सिंह की मिमिक्री से न केवल दर्शक मनोरंजन करते थे, बल्कि यह कला उनके लिए एक जीविका का साधन भी बनी। उन्होंने इस कला के माध्यम से समाज में महिलाओं की भूमिका को भी सशक्त किया।
तीन महीने से जूझ रहीं थीं फेफड़ों के संक्रमण से
आशा सिंह पिछले तीन महीनों से फेफड़ों के गंभीर संक्रमण से जूझ रही थीं। उनका इलाज मुंबई के एक प्रतिष्ठित अस्पताल में चल रहा था, जहां डॉक्टरों ने उन्हें बचाने के भरसक प्रयास किए। यह संक्रमण उनकी उम्र के कारण और भी जटिल हो गया था।
परिवार के सदस्यों ने इस दौरान उनके साथ समय बिताया और उनके स्वास्थ्य में सुधार की उम्मीद बनाए रखी। उनके संघर्ष ने उनके प्रशंसकों को भावुक कर दिया, जो उनकी सेहत के लिए प्रार्थना कर रहे थे। आशा सिंह ने इस कठिन दौर में भी धैर्य और साहस का परिचय दिया।
फिल्मों और सामाजिक कार्यों में योगदान
आशा सिंह ने ‘बाजीगर’, ‘दीवानगी’ जैसी कई चर्चित फिल्मों में काम किया। वह ‘आशा इवेंट्स एंड फिल्म्स’ की संस्थापक और संचालक भी थीं। उनका योगदान सिर्फ फिल्म जगत तक सीमित नहीं था। उन्होंने समाज सेवा के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए।
उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में सक्रिय भूमिका निभाई। विशेषकर महिलाओं और बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार के लिए कार्य किया। उनकी संस्था ने कई कार्यक्रम आयोजित किए, जिनका उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना था। आशा सिंह ने अपनी कला के माध्यम से समाज के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन किया।
आखिरी विदाई
उनका अंतिम संस्कार 23 अगस्त को विले पार्ले के पवन हंस श्मशान भूमि में किया गया। उनके बेटे आकाश भारद्वाज ने इस बात की पुष्टि की। उनके अंतिम संस्कार में परिवार, मित्र और फिल्म जगत की कई हस्तियां शामिल हुईं। सभी ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनकी यादों को संजोया।
उनकी विदाई के वक्त, वहां मौजूद हर व्यक्ति की आंखें नम थीं। आशा सिंह की अंतिम यात्रा में उनके चाहने वालों का हुजूम उमड़ पड़ा, जो उनके प्रति गहरे सम्मान और प्रेम का प्रतीक था।
आगे की राह
आशा सिंह का निधन भारतीय फिल्म और टीवी उद्योग के लिए एक बड़ी क्षति है। उनकी कला और योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा। नई पीढ़ी के कलाकार उनसे प्रेरणा लेते रहेंगे।
उनकी विरासत जीवित रहेगी और उनका कार्य भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्रेरणास्रोत बनेगा। आशा सिंह ने जिस समर्पण और लगन से अपने कार्यक्षेत्र में योगदान दिया, वह दूसरों के लिए एक मिसाल है।



