इंदौर। मध्यप्रदेश के पूर्व सीएम और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह के पुत्र जयवर्धन राजनीति में आ तो गए हैं, लेकिन पिता के नक्शे-कदम से कोसों दूर हैं। अभी भी वे दोस्तों के साथ बंधे रहते हैं और पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं की परवाह नहीं करते। ऐसे में पिता की राजनीतिक विरासत कैसे आगे बढ़ा पाएंगे?
इंदौर आए तो दोस्तों से घिरे रहे
👉 यह भी पढ़ें:
- मध्यप्रदेश में 32 आईएएस के तबादले, ग्वालियर और सतना के नगर निगम कमिश्नर बदले
- MP में एनालॉग पनीर बैन, सीएम यादव ने दिए आदेश, इंदौर में कार्रवाई
- मध्य प्रदेश को मिलेंगी पांच नई हवाई सुविधाएं, 10 हवाई पट्टियों को हवाई अड्डों में बदलने की तैयारी; क्षेत्रीय संपर्क को मिलेगी गति
- मध्यप्रदेश में बस यात्रा हुई महंगी, ट्रांसपोर्टरों ने दी थी हड़ताल की धमकी, यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रख सरकार ने लिया फैसला, मात्र 75 पैसे बढ़ाए
- मध्यप्रदेश कांग्रेस में बड़ी सर्जरी की तैयारी : सभी विभाग, प्रकोष्ठ और इकाइयां भंग, प्रदेश कार्यकारिणी पर भी गिर सकती है गाज
- मध्यप्रदेश में मेडिकल शिक्षा होगी सस्ती: NEET मेरिट छात्रों को कम फीस और ज्यादा सीटों का बड़ा फायदा
बुधवार को जयवर्धन सिंह प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के काका के निधन पर उनके घर शोक व्यक्त करने के लिए इंदौर आए थे। हर बार की तरह इस बार भी जयवर्धन के मित्र सुवेग राठी उनकी कार में बैठ गए। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अब हो गया बंटाधार। अब पूरा रिमोट सुवेग के हाथ में ही रहेगा।
दिग्गी समर्थक नेताओं को फिर निराशा
जब भी जयवर्धन सिंह इंदौर आते हैं तो उनके पिता के समर्थक नेता उनके स्वागत के लिए आतुर रहते हैं। उनकी कोशिश होती है कि जयवर्धन अपने पिता के समर्थक नेताओं से मिलें, उनके घर जाएं। कार्यकर्ताओं का उत्साहवर्धन करें, लेकिन ऐसा कुछ होता नहीं। भले ही जयवर्धन चाहे कोई भी प्लान बनाकर इंदौर आएं, लेकिन यहां सबकुछ सुवेग के हिसाब से ही तय होता है। इस बार भी जयवर्धन, सुवेग के मार्गदर्शन में शहर में भ्रमण करते रहे जिससे दिग्गी समर्थक नेताओं और कार्यकर्ताओं को फिर निराशा हुई।
पिता के बनाए पिच पर खेल भी नहीं पा रहे
दिग्गी समर्थक कांग्रेस के कई नेताओं का कहना है कि पूरे मध्यप्रदेश के साथ ही इंदौर में भी दिग्विजय सिंह ने मजबूत राजनीतिक पिच तैयार कर रखी है। जयवर्धन सिंह को सिर्फ इस पर खेलना है, लेकिन वे इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे। ऐसे में तो पिता की विरासत को आगे बढ़ाना मुश्किल है।
कांग्रेस में दिग्गी समर्थकों की सख्या सबसे ज्यादा
कांग्रेस नेता यह भी कह रहे हैं कि मध्यप्रदेश में आज भी दिग्विजय सिंह के समर्थकों की संख्या सबसे ज्यादा है। दिग्विजय सिंह ही एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिनकी पकड़ पूरे प्रदेश पर है। यही वजह है कि वे जहां भी जाते हैं उनके समर्थकों की भीड़ उमड़ पड़ती है। जयवर्धन सिंह इसका फायदा भी नहीं उठा पा रहे। एक्के-दुक्के परिचित छुटभैये नेताओं के साथ घूमते रहते हैं। कांग्रेस नेता कह रहे है कि अगर ऐसी ही स्थिति रही तो कई अन्य नेताओं को पुत्रों की तरह जयवर्धन भी राजनीति में खप जाएंगे।



